करवाचौथ पर गलती से भी न करें ये काम: वरना रुष्ट हो सकती हैं माता करवा
सनातन धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए Karva Chauth का व्रत अटूट प्रेम, त्याग और अखंड सौभाग्य का प्रतीक है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी जीवन के लिए निर्जला उपवास रखती हैं। शास्त्रों में इस व्रत को लेकर कुछ जरूरी नियम बताए गए हैं। अगर इस दिन अनजाने में भी कुछ गलतियां हो जाएं, तो व्रत का पूरा फल नहीं मिलता।
यदि आप भी इस वर्ष Karva Chauth का व्रत रख रही हैं, तो इन बातों का विशेष ध्यान रखें:
1. सरगी से जुड़े नियम
सही समय पर खाएं: सरगी हमेशा सूर्योदय से पहले (ब्रह्म मुहूर्त में) ही खाएं। सूर्योदय के बाद कुछ भी खाना या पीना मना है।
सात्विक आहार लें: सरगी में फल, दूध, मिठाई और ड्राई फ्रूट्स लें। ज्यादा तला-भुना या लहसुन-प्याज़ वाला खाना न खाएं।
2. काले और सफेद कपड़े न पहनें
अशुभ रंगों से बचें: करवाचौथ के दिन काले, सफेद या ग्रे रंग के कपड़े बिल्कुल न पहनें।
शुभ रंग चुनें: पूजा के समय लाल, गुलाबी, पीला या नारंगी रंग पहनना बहुत शुभ माना जाता है।
3. नुकीली वस्तुओं का इस्तेमाल न करें
सिलाई-कढ़ाई न करें: इस दिन सुई, धागा, कैंची, चाकू या ब्लेड जैसी चीजों को हाथ न लगाएं।
सब्जी काटने से बचें: व्रत वाले दिन कपड़ा सिलना, बटन लगाना या सब्जी काटना वर्जित माना जाता है।
4. किसी का दिल न दुखाएं
अपशब्द न बोलें: इस दिन घर के बड़ों, सास-ससुर या पति से बहस न करें।
मन साफ रखें: क्रोध, चुगली और किसी का अपमान करने से व्रत का पुण्य खत्म हो जाता है।
5. सुहाग की वस्तुएं न फेंकें
इस्तेमाल की चीजें न दें: अपनी पहनी हुई चूड़ी, सिंदूर या बिंदी किसी और को न दें।
टूटी चीजें सही से संभालें: अगर पूजा की तैयारी में चूड़ी टूट जाए तो उसे कचरे में फेंकने के बजाय संभालकर जल में प्रवाहित कर दें।
6. सफेद चीजों का दान न करें
दूध-दही न दें: Karva Chauth के दिन दूध, दही, चावल या सफेद कपड़े किसी को दान में न दें।
शृंगार का दान करें: दान करना हो तो किसी सुहागिन स्त्री को फल, वस्त्र या शृंगार का सामान भेंट करें।
7. दिन में सोने से बचें
भक्ति में समय बिताएं: व्रत के दौरान दोपहर में सोने के बजाय भगवान शिव, पार्वती जी और गणेश जी का ध्यान करें और करवाचौथ की कथा सुनें।
8. चंद्र दर्शन के नियम
छलनी से देखें: चंद्रमा को देखने के बाद ही उसी छलनी से पति का चेहरा देखें।
अर्घ्य का ध्यान रखें: जल चढ़ाते समय ध्यान रखें कि पानी आपके पैरों पर न पड़े। इसके बाद पति के हाथ से जल पीकर ही अपना व्रत खोलें।
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