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Nag Panchami 2026 Date and Puja Muhurat image with Shivling and Nag Devta in Hindi font.
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Nag Panchami 2026: 16 या 17 अगस्त, कब है नाग पंचमी? जानें सही तिथि और पूजा का मुहूर्त

Nag Panchami 2026: 16 या 17 अगस्त, कब है नाग पंचमी? जानें सही तिथि और पूजा का मुहूर्त सनातन धर्म में नाग पंचमी का पर्व अत्यंत पवित्र और फलदायी माना गया है। सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाए जाने वाले इस त्योहार पर नाग देव और भगवान शिव की पूजा करने से कालसर्प दोष, राहु-केतु के अशुभ प्रभाव और सर्प भय से मुक्ति मिलती है। वर्ष 2026 में Nag Panchami की सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि को लेकर सभी महत्वपूर्ण जानकारियां नीचे दी गई हैं। Nag Panchami 2026: सही तिथि और उदयातिथि हिंदू पंचांग के अनुसार सावन शुक्ल पंचमी तिथि की शुरुआत और उदयातिथि के विचार से पर्व की मुख्य तिथि तय होती है: पंचमी तिथि प्रारंभ: 16 अगस्त 2026 पंचमी तिथि समाप्त: 17 अगस्त 2026 शास्त्रों में उदयातिथि का विशेष महत्व है, इसलिए Nag Panchami का मुख्य पर्व 17 अगस्त 2026 को ही मनाया जाएगा। पूजा का शुभ मुहूर्त पूजा का श्रेष्ठ मुहूर्त: 17 अगस्त 2026 को प्रातः 05:51 बजे से प्रातः 08:31 बजे तक। कुल अवधि: 2 घंटे 40 मिनट। इस शुभ समय में नाग देव का पूजन और दुग्धाभिषेक करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। Nag Panchami का महत्त्व कालसर्प दोष से मुक्ति: जिन जातकों की कुंडली में कालसर्प दोष या राहु-केतु से संबंधित कष्ट हैं, उनके लिए Nag Panchami पर पूजा करना विशेष लाभदायक है। सुख-समृद्धि और भय से रक्षा: नाग देव की कृपा से परिवार में किसी को सर्प भय नहीं रहता और घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है। संक्षिप्त पूजा विधि स्नान और संकल्प: सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा का संकल्प लें। नाग देव का पूजन: घर के मुख्य द्वार पर हल्दी या रोली से नाग की आकृति बनाएं या मंदिर में प्रतिमा स्थापित करें। अभिषेक और भोग: नाग देव को कच्चा दूध, जल, रोली, अक्षत, फूल और भुना हुआ चना या खीर अर्पित करें। मंत्र और आरती: “ॐ नागदेवतायै नमः” का जाप करें और धूप-दीप से आरती उतारें। Nag Panchami पर क्या करें और क्या न करें? क्या करें: भगवान शिव और नाग देव की साथ में पूजा करें और जरूरतमंदों को दान दें। क्या न करें: इस दिन जमीन की खुदाई या जुताई न करें और किसी भी जीव को नुकसान न पहुंचाएं। निष्कर्ष 17 अगस्त 2026 को शुभ मुहूर्त में Nag Panchami का पूजन करके आप अपने जीवन के दोषों से मुक्ति पा सकते हैं और भगवान शिव व नाग देव की कृपा प्राप्त कर सकते हैं। ज्योतिषीय परामर्श व कुंडली विश्लेषण के लिए संपर्क करें: Acharya Sharad Swarup Mobile: 9818359075 | 9953359075 Brand: Bhavishya Nakshatra Connect With Us on Social Media: YouTube: https://www.youtube.com/@BhavishyaNakshatra Instagram: https://www.instagram.com/bhavishyanakshatra/ Facebook: https://www.facebook.com/BhavishyaNakshatra.in/

सावन 2026 की तिथियां, पूजा विधि और उपाय - भविष्य नक्षत्र आचार्य शरद स्वरूप
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सावन 2026: श्रावण तिथियां, पूजा विधि, महत्व और विशेष उपाय

सावन 2026: श्रावण तिथियां, पूजा विधि, महत्व और विशेष उपाय सनातन धर्म में श्रावण मास यानी सावन का महीना अत्यंत पवित्र और फलदायी माना गया है। यह पूरा महीना भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन के महीने में शिवजी पृथ्वी लोक पर निवास करते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। सावन 2026 की मुख्य तिथियां (Sawan Dates) वर्ष 2026 में सावन का महीना 30 जुलाई 2026 (गुरुवार) से शुरू होकर 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार – रक्षाबंधन) तक रहेगा। सावन सोमवार व्रत सूची 2026: पहला सावन सोमवार: 03 अगस्त 2026 दूसरा सावन सोमवार: 10 अगस्त 2026 तीसरा सावन सोमवार: 17 अगस्त 2026 चौथा सावन सोमवार: 24 अगस्त 2026 भगवान शिव की सरल पूजा विधि (Puja Vidhi) प्रातः स्नान: सावन के दिनों में सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। जलाभिषेक: तांबे के लोटे में गंगाजल, शुद्ध जल, कच्चा दूध और शहद मिलाकर शिवलिंग पर चढ़ाएं। सामग्री अर्पित करें: शिवलिंग पर 3 या 5 बेलपत्र, शमी के पत्ते, धतूरा, सफेद चंदन और आंकड़े के फूल चढ़ाएं। आरती व मंत्र: “ॐ नमः शिवाय” या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें और शिव चालीसा का पाठ कर आरती करें। सावन में करें ये अचूक उपाय (Astro Upay) शीघ्र विवाह के लिए: सावन के सोमवार को जल में केसर मिलाकर शिवलिंग पर अभिषेक करें। धन वृद्धि के लिए: शिवलिंग पर गन्ने के रस से अभिषेक करें और बेलपत्र अर्पित करें। रोग मुक्ति के लिए: सावन में रोज महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जाप करें। कालसर्प दोष निवारण: सावन सोमवार या नाग पंचमी पर शिवलिंग पर चांदी के नाग-नागिन का जोड़ा अर्पित करें। सावन में क्या करें और क्या न करें क्या करें: सात्विक आहार लें, गरीबों की मदद करें और प्रतिदिन शिव मंत्रों का जाप करें। क्या न करें: सावन में मांस-मदिरा, प्याज-लहसुन का सेवन न करें और शिवलिंग पर हल्दी या तुलसी न चढ़ाएं। ज्योतिषीय परामर्श एवं कुंडली विश्लेषण के लिए संपर्क करें: आचार्य शरद स्वरूप (Acharya Sharad Swarup) भविष्य नक्षत्र (Bhavishya Nakshatra) 📞 संपर्क नंबर: 9818359075 | 9953359075 🌐 Social Media: YouTube: https://www.youtube.com/@BhavishyaNakshatra Instagram: https://www.instagram.com/bhavishyanakshatra/ Facebook: https://www.facebook.com/BhavishyaNakshatra.in/

सूर्य देव अपने रथ पर, साथ में मेष और सिंह राशि के प्रतीक।
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सूर्य का स्वराशि प्रवेश: 2 राशियों पर बड़ा प्रभाव! | Surya Gochar

सूर्य का स्वराशि प्रवेश: 2 राशियों पर बड़ा प्रभाव! | Surya Gochar ज्योतिष शास्त्र में सूर्य का राशि परिवर्तन बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। जब ग्रहों के राजा सूर्य अपनी ही राशि (सिंह) में प्रवेश करते हैं, तो उनका प्रभाव अत्यधिक शक्तिशाली और शुभ हो जाता है। इस महागोचर का असर सभी राशियों पर पड़ेगा, लेकिन 2 खास राशियां ऐसी हैं जिनके लिए यह समय बहुत बड़े बदलाव और सफलता लेकर आने वाला है। 1. सिंह राशि (Leo) – तरक्की और मान-सम्मान सिंह राशि सूर्य देव की अपनी स्वराशि है। लग्न भाव में प्रवेश करने से आपका आत्मविश्वास और प्रभाव बढ़ेगा। करियर: नौकरी में प्रमोशन और नए अवसर मिलेंगे। बिजनेस में बड़े सौदे तय हो सकते हैं। सावधानी: स्वभाव में अहंकार (Ego) और गुस्से से बचें। 2. मेष राशि (Aries) – आर्थिक लाभ और सफलता मेष राशि के लिए सूर्य का यह गोचर पंचम भाव में होगा, जो अत्यंत शुभ माना जाता है। लाभ: आय के नए स्रोत बनेंगे और रुका हुआ धन वापस मिलेगा। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों को सफलता मिलेगी। सावधानी: सेहत और खान-पान का ध्यान रखें। सरल उपाय प्रतिदिन सुबह तांबे के लोटे से सूर्य देव को जल अर्पित करें। “ॐ सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करें। अपने पिता का आशीर्वाद लें। भविष्य नक्षत्र (Bhavishya Nakshatra) आचार्य शरद स्वरूप (Acharya Sharad Swarup) संपर्क सूत्र (Number): 9818359075 | 9953359075 सोशल मीडिया (Social Media Links): YouTube: https://www.youtube.com/@BhavishyaNakshatra Instagram: https://www.instagram.com/bhavishyanakshatra/ Facebook: https://www.facebook.com/BhavishyaNakshatra.in/

"ग्रह गोचर ब्लॉग बैनर: सौरमंडल के ग्रहों और राशि चक्र के साथ आचार्य शरद स्वरूप की ज्योतिषीय जानकारी।"
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क्या होता है ग्रह गोचर और यह जीवन को कैसे प्रभावित करता है?

क्या होता है ग्रह गोचर और यह जीवन को कैसे प्रभावित करता है? ज्योतिष शास्त्र में ग्रह गोचर का बहुत बड़ा महत्व है। जीवन में अचानक आने वाले उतार-चढ़ाव, सफलता या परेशानियों के पीछे अक्सर ग्रहों की चाल यानी ग्रह गोचर का ही हाथ होता है। आइए इसे आसान शब्दों में समझें। ग्रह गोचर क्या है? ‘गोचर’ का अर्थ है – ग्रहों का चलना। जन्म के समय आकाश में ग्रहों की जो स्थिति होती है, वह आपकी जन्म कुंडली बनती है। लेकिन ब्रह्मांड में ग्रह लगातार घूमते रहते हैं। एक राशि से दूसरी राशि में ग्रहों का यह प्रवेश ही ग्रह गोचर कहलाता है। जन्म कुंडली आपके जीवन का ब्लूप्रिंट है। ग्रह गोचर समय के साथ बदलने वाला मौसम है। ग्रहों की गोचर अवधि हर ग्रह की चाल अलग होती है: चंद्रमा: लगभग ढाई दिन (मन और मूड पर असर) सूर्य, बुध, शुक्र: लगभग 1 महीना मंगल: लगभग 45 दिन गुरु (बृहस्पति): लगभग 1 वर्ष राहु-केतु: लगभग डेढ़ साल शनि: लगभग ढाई साल (साढ़ेसाती या ढैय्या का कारण) जीवन पर प्रभाव करियर और बिजनेस: शनि और गुरु का शुभ ग्रह गोचर नौकरी में तरक्की और व्यापार में मुनाफा दिलाता है। धन लाभ: बृहस्पति और शुक्र का अनुकूल गोचर आर्थिक स्थिति मजबूत करता है। स्वास्थ्य और मन: चंद्रमा और सूर्य का गोचर मानसिक शांति और ऊर्जा को प्रभावित करता है। गोचर के अशुभ प्रभावों से बचाव के उपाय यदि कोई ग्रह गोचर आपके लिए प्रतिकूल चल रहा है, तो घबराएं नहीं: संबंधित ग्रह के बीज मंत्रों का नियमित जाप करें। जरूरतमंदों को दान-पुण्य करें। प्रतिदिन सुबह सूर्य देव को तांबे के लोटे से जल अर्पित करें। निष्कर्ष ग्रह गोचर हमें भविष्य के बदलावों का संकेत देता है। यदि आप अपनी कुंडली के अनुसार वर्तमान ग्रह गोचर का प्रभाव जानना चाहते हैं, तो हमसे संपर्क करें। मार्गदर्शन एवं परामर्श के लिए संपर्क करें: आचार्य शरद स्वरूप (Acharya Sharad Swarup) भविष्य नक्षत्र (Bhavishya Nakshatra) 📞 संपर्क सूत्र: +91 9818359075 | +91 9953359075 सोशल मीडिया लिंक्स: YouTube: https://www.youtube.com/@BhavishyaNakshatra Instagram: https://www.instagram.com/bhavishyanakshatra/ Facebook: https://www.facebook.com/BhavishyaNakshatra.in/

एक ज्योतिषीय यूट्यूब थंबनेल जिसमें हिंदी टेक्स्ट लिखा है: 'बिना जन्म समय कुंडली बनेगी!', साथ ही एक जन्म कुंडली चार्ट, आचार्य शरद स्वरूप का नाम और फोन नंबर।
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जन्म का समय और तारीख नहीं पता? तब भी बनेगी आपकी कुंडली!

जन्म का समय और तारीख नहीं पता? तब भी बनेगी आपकी कुंडली! क्या आप अपनी कुंडली बनवाना चाहते हैं, लेकिन जन्म की सही तारीख या समय नहीं पता? अक्सर जन्मपत्री खो जाने या समय का सटीक हिसाब न होने पर लोग परेशान हो जाते हैं। लेकिन निराश होने की जरूरत नहीं है! वैदिक ज्योतिष में बिना जन्म विवरण के भी एक सटीक कुंडली तैयार की जा सकती है। बिना जन्म विवरण के कैसे बनती है कुंडली? प्रश्न कुंडली (Prashna Kundali): जिस समय आप ज्योतिषाचार्य से अपना सवाल पूछते हैं, उसी क्षण के ग्रह-नक्षत्रों के आधार पर आपकी तत्काल कुंडली बनाकर सटीक फलादेश किया जाता है। हस्तरेखा शास्त्र (Palmistry): हथेली की रेखाओं और ग्रहों के पर्वतों का विश्लेषण करके आपके करियर, विवाह और स्वास्थ्य की जानकारी दी जाती है। नाम राशि (Name Astrology): आपके प्रचलित नाम के पहले अक्षर की ध्वनि से सांकेतिक कुंडली तैयार की जाती है। सामुद्रिक शास्त्र (Face Reading): चेहरे के भावों और शारीरिक बनावट से ग्रहों के प्रभाव को पहचाना जाता है। मुख्य फायदे त्वरित समाधान: वर्तमान समस्याओं का तुरंत और सटीक मार्गदर्शन। ग्रह शांति: सही लक्षणों को देखकर सटीक रत्न व पूजा-पाठ के उपाय। भविष्य का मार्गदर्शन: करियर और व्यापार में सही निर्णय लेने में मदद। निष्कर्ष यदि आपके पास जन्म का सही समय नहीं है, तो निराश होने की जरूरत नहीं है। प्रश्न शास्त्र और हस्तरेखा के माध्यम से आपकी कुंडली का विश्लेषण करके जीवन को सही दिशा दी जा सकती है। अपनी समस्याओं के सटीक और विश्वसनीय समाधान के लिए आज ही संपर्क करें! ज्योतिष परामर्श के लिए संपर्क करें: आचार्य: आचार्य शरद स्वरूप (Acharya Sharad Swarup) संस्थान: भविष्य नक्षत्र (Bhavishya Nakshatra) 📞 मोबाइल नंबर: 9818359075 9953359075 🌐 हमारे सोशल मीडिया चैनल: YouTube: https://www.youtube.com/@BhavishyaNakshatra Instagram: https://www.instagram.com/bhavishyanakshatra/ Facebook: https://www.facebook.com/BhavishyaNakshatra.in/ Bhavishya Nakshatra

Red Coral Moonga and Blue Sapphire Neelam gemstones for Mesh and Kumbh rashi with Acharya Sharad Swarup contact details.
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कुंभ और मेष राशि के लिए कौन सा रत्न है सबसे जरूरी? जानें सही रत्न और लाभ

कुंभ और मेष राशि के लिए कौन सा रत्न है सबसे जरूरी? जानें सही रत्न और लाभ वैदिक ज्योतिष में रत्नों का विशेष महत्व है। सही ratn धारण करने से व्यक्ति के जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता आती है। आइए जानते हैं कि mesh (Aries) और kumbh (Aquarius) राशि के जातकों के लिए कौन सा रत्न सबसे उत्तम और जरूरी है। 1. मेष राशि (Mesh) के लिए जरूरी रत्न: मूंगा (Red Coral) mesh राशि के स्वामी ग्रह मंगल (Mars) हैं, जो साहस, ऊर्जा और पराक्रम के कारक हैं। मुख्य रत्न: मूंगा (Red Coral) शुभ दिन व धातु: मंगलवार | तांबा या सोना पहनने की अंगुली: अनामिका (Ring Finger) प्रमुख लाभ: आत्मविश्वास में वृद्धि: mesh राशि के लोगों में ऊर्जा और निडरता बढ़ाता है। स्वास्थ्य लाभ: रक्त संबंधी समस्याओं और शारीरिक कमजोरी को दूर करता है। करियर में सफलता: नेतृत्व क्षमता (Leadership) और कार्यकुशलता में सुधार लाता है। 2. कुंभ राशि (Kumbh) के लिए जरूरी रत्न: नीलम (Blue Sapphire) kumbh राशि के स्वामी ग्रह शनि (Saturn) हैं, जो न्याय, अनुशासन और मेहनत का प्रतिनिधित्व करते हैं। मुख्य रत्न: नीलम (Blue Sapphire) उप-रत्न: जमुनिया (Amethyst) या फिरोजा शुभ दिन व धातु: शनिवार | पंचधातु या चाँदी पहनने की अंगुली: मध्यमा (Middle Finger) प्रमुख लाभ: तीव्र प्रगति: kumbh राशि के जातकों को करियर और व्यापार में त्वरित सफलता दिलाता है। मानसिक शांति: तनाव दूर कर निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करता है। सुरक्षा कवच: बुरी नजर, दुर्घटनाओं और आर्थिक तंगी से रक्षा करता है। मेष और कुंभ राशि के रत्नों की तुलना राशि स्वामी ग्रह मुख्य रत्न धारण करने का दिन शुभ अंगुली Mesh (मेष) मंगल मूंगा (Red Coral) मंगलवार अनामिका (Ring Finger) Kumbh (कुंभ) शनि नीलम (Blue Sapphire) शनिवार मध्यमा (Middle Finger) रत्न धारण करते समय ध्यान रखने योग्य जरूरी नियम प्राकृतिक व लैब-प्रमाणित रत्न: हमेशा असली और लैब-सर्टिफाइड ratn ही धारण करें। प्राण प्रतिष्ठा: धारण करने से पहले रत्न को गंगाजल व दूध से शुद्ध कर मंत्रों द्वारा सिद्ध जरूर कराएं। नीलम का परीक्षण: kumbh राशि के जातक नीलम पहनने से पहले 3-4 दिन इसका परीक्षण (Test) अवश्य करें। निष्कर्ष mesh राशि के लिए मूंगा और kumbh राशि के लिए नीलम (या जमुनिया) सबसे फलदायी ratn माने जाते हैं। सटीक परिणाम के लिए हमेशा अपनी कुंडली का विश्लेषण करवाकर ही सही वजन (रत्ती) का रत्न धारण करें। ज्योतिषीय परामर्श एवं सटीक कुंडली विश्लेषण के लिए संपर्क करें: Acharya Sharad Swarup Bhavishya Nakshatra संपर्क सूत्र: 9818359075 | 9953359075 सोशल मीडिया लिंक्स: YouTube: https://www.youtube.com/@BhavishyaNakshatra Instagram: https://www.instagram.com/bhavishyanakshatra/ Facebook: https://www.facebook.com/BhavishyaNakshatra.in/

सावन सोमवार 2026 व्रत कथा और तिथियों का थंबनेल
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Sawan Somvar Vrat Katha 2026: जानिए सावन सोमवार की तिथि सूची, व्रत कथा और पूजा विधि

Sawan Somvar Vrat Katha 2026: जानिए सावन सोमवार की तिथि सूची और व्रत कथा सावन का पवित्र महीना भगवान भोलेनाथ की भक्ति के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। मान्यता है कि जो भी भक्त सावन के सोमवार का व्रत पूरी श्रद्धा से रखते हैं, शिव जी उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। आइए जानते हैं इस साल की sawan somvar list 2026, पूजा विधि और पावन sawan somvar vrat katha। Sawan Somvar List 2026 (तिथियों की सूची) इस वर्ष सावन के महीने में कुल 5 सोमवार आ रहे हैं: पहला सावन सोमवार: 20 जुलाई 2026 दूसरा सावन सोमवार: 27 जुलाई 2026 तीसरा सावन सोमवार: 03 अगस्त 2026 चौथा सावन सोमवार: 10 अगस्त 2026 पांचवां सावन सोमवार: 17 अगस्त 2026 सावन सोमवार पूजा विधि (Puja Vidhi) सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें। घर के मंदिर में दीप जलाकर व्रत का संकल्प लें। शिवलिंग पर गंगाजल, कच्चा दूध, बेलपत्र, धतूरा और चंदन अर्पित करें। पूजा के समय sawan somvar vrat katha का पाठ अवश्य करें या सुनें। अंत में आरती करें और भोलेनाथ को भोग लगाकर पूरे दिन “ॐ नमः शिवाय” का जाप करें। पावन सावन सोमवार व्रत कथा (Sawan Somvar Vrat Katha) पौराणिक कथा के अनुसार, एक धनी व्यापारी था जिसके पास सब कुछ था, लेकिन संतान न होने के कारण वह दुखी रहता था। पुत्र की कामना के लिए वह हर सोमवार को पूरी श्रद्धा से भगवान शिव का व्रत रखता था। उसकी भक्ति देखकर माता पार्वती के अनुरोध पर भगवान शिव ने उसे पुत्र प्राप्ति का वरदान तो दिया, लेकिन कहा कि उस बालक की आयु केवल 12 वर्ष होगी। समय आने पर व्यापारी के घर एक सुंदर पुत्र का जन्म हुआ। जब बालक 11 वर्ष का हुआ, तो उसे शिक्षा के लिए काशी भेजा गया। रास्ते में एक नगर के राजा की पुत्री से उसका विवाह भी संपन्न हो गया। जब बालक ठीक 12 वर्ष का हुआ, तो काशी में एक यज्ञ के दौरान उसके प्राण निकल गए। उसके मामा का विलाप सुनकर वहां से गुजर रहे भगवान शिव और माता पार्वती अत्यंत द्रवित हो उठे। माता पार्वती के बार-बार आग्रह करने पर भोलेनाथ ने उस बालक को दोबारा जीवित कर दिया। बालक अपनी पत्नी के साथ सकुशल घर लौटा। व्यापारी समझ गया कि यह सब सोमवार व्रत का ही प्रताप है। तभी से समाज में sawan somvar vrat katha और इस व्रत का महत्व अत्यधिक बढ़ गया। जो भी भक्त इस पावन sawan somvar vrat katha को सुनता है, भोलेनाथ उसके सारे संकट दूर कर देते हैं। व्रत के मुख्य नियम व्रत में तामसिक भोजन (लहसुन, प्याज, मांस-मदिरा) का सेवन बिल्कुल न करें। शाम की आरती के बाद आप सेंधा नमक का उपयोग कर फलाहार कर सकते हैं। ज्योतिषीय परामर्श, कुंडली विश्लेषण और हस्तरेखा विज्ञान के लिए आज ही संपर्क करें। भव्य भविष्य की राह – भविष्य नक्षत्र (Bhavishya Nakshatra) Acharya Sharad Swarup Call/WhatsApp: 9818359075 | 9953359075 हमारे सोशल मीडिया पेजेस से जुड़ें (Connect With Us): YouTube: https://www.youtube.com/@BhavishyaNakshatra Instagram: https://www.instagram.com/bhavishyanakshatra/ Facebook: https://www.facebook.com/BhavishyaNakshatra.in/

Guru Purnima 2026 date shubh muhurat aur puja vidhi by Acharya Sharad Swarup Bhavishya Nakshatra.
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Guru Purnima 2026: 28 या 29 जुलाई, गुरु पूर्णिमा कब है? जानें शुभ योग, मुहूर्त और पूजन विधि

Guru Purnima 2026: 28 या 29 जुलाई, गुरु पूर्णिमा कब है? जानें शुभ योग, मुहूर्त और पूजन विधि सनातन धर्म में गुरु को भगवान से भी ऊंचा दर्जा दिया गया है। ‘गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूं पाय, बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो मिलाय’— कबीरदास जी का यह दोहा हमें सिखाता है कि बिना गुरु के ईश्वर तक पहुँचने का मार्ग भी नहीं मिल सकता। हर साल आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा (या व्यास पूर्णिमा) के रूप में बेहद श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। साल 2026 में इस त्योहार की सही तारीख को लेकर लोगों के मन में थोड़ी उलझन है कि Guru Purnima 2026 आखिर 28 जुलाई को है या 29 जुलाई को? ज्योतिषीय गणनाओं और पंचांग के अनुसार, आज हम आपके इस संशय को दूर करेंगे। इस लेख में हम जानेंगे कि साल 2026 में गुरु पूर्णिमा की सही तारीख, शुभ मुहूर्त, बनने वाले दुर्लभ संयोग और घर पर की जाने वाली सटीक पूजन विधि क्या है। 28 या 29 जुलाई: कब है Guru Purnima 2026? हिंदू कैलेंडर और पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि की शुरुआत और समाप्ति का समय किसी भी व्रत या त्योहार को मनाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। साल 2026 में आषाढ़ पूर्णिमा तिथि की गणना कुछ इस प्रकार है: पूर्णिमा तिथि का आरंभ: 28 जुलाई 2026 को शाम 06 बजकर 18 मिनट से. पूर्णिमा तिथि का समापन: 29 जुलाई 2026 को रात 08 बजकर 05 मिनट पर. शास्त्रों के अनुसार निर्णय: चूंकि हिंदू धर्म में उदय तिथि (सूर्योदय के समय मौजूद तिथि) को त्योहार मनाने के लिए सर्वोपरि माना जाता है, इसलिए Guru Purnima 2026 का पावन पर्व 29 जुलाई 2026, बुधवार को ही मनाया जाएगा। इस दिन पूरे देश में गुरु पूजन, दान-पुण्य और पवित्र नदियों में स्नान किया जाएगा। हालांकि, जो लोग पूर्णिमा का व्रत (चंद्रोदय व्यापिनी तिथि के अनुसार) रखते हैं, वे अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार 28 जुलाई की शाम से भी व्रत का संकल्प ले सकते हैं。 लेकिन मुख्य रूप से गुरु वंदना और उत्सव 29 जुलाई को ही उदित होगा। शुभ मुहूर्त और चौघड़िया (Guru Purnima 2026 Muhurat) 29 जुलाई 2026 को गुरु पूजन के लिए कई श्रेष्ठ मुहूर्त उपलब्ध हैं। यदि आप अपने गुरुदेव के आश्रम जा रहे हैं या घर पर ही उनकी तस्वीर का पूजन कर रहे हैं, तो इन समयों का ध्यान रखें: मुहूर्त का प्रकार समय (IST) ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:17 AM से 04:59 AM प्रातः काल पूजा मुहूर्त सुबह 05:41 AM से 09:05 AM अमृत काल (सर्वोत्तम) सुबह 08:34 AM से 10:20 AM विजय मुहूर्त दोपहर 02:43 PM से 03:37 PM गोधूलि मुहूर्त शाम 07:14 PM को 07:35 PM विशेष सावधानी (राहुकाल): ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, राहुकाल के दौरान कोई भी नया या मांगलिक कार्य नहीं करना चाहिए। 29 जुलाई 2026 को राहुकाल दोपहर 12:27 PM से 02:09 PM तक रहेगा। इस समय अवधि में मुख्य गुरु पूजा या दीक्षा लेने से बचें। इस बार बनने वाले शुभ और दुर्लभ योग साल Guru Purnima 2026 पर ग्रहों का एक बहुत ही सुंदर और दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस दिन चंद्रमा मकर राशि और उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में गोचर करेंगे। इसके साथ ही ज्योतिष में ज्ञान, बुद्धि और गुरु के कारक माने जाने वाले देवगुरु बृहस्पति भी अनुकूल स्थिति में रहकर जातकों को विशेष आशीष देंगे। इस दिन किए गए मंत्र जाप, ध्यान और गुरु सेवा का फल सामान्य दिनों की तुलना में हजार गुना अधिक प्राप्त होता है। स्टेप-बाय-स्टेप गुरु पूर्णिमा पूजन विधि (Puja Vidhi) यदि आप इस पावन दिन पर अपने गुरु का आशीर्वाद लेना चाहते हैं, तो शास्त्रों में बताई गई इस सरल विधि से पूजा संपन्न करें: 1.स्नान और संकल्प:सुबह 05:00 – 06:30 AM. सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं। यदि संभव हो तो पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिला लें। इसके बाद स्वच्छ, सफेद या पीले रंग के वस्त्र धारण करें और हाथ में जल लेकर व्रत या गुरु पूजन का संकल्प लें। 2.पूजा स्थल की तैयारी:सुबह 06:30 – 07:00 AM. घर के उत्तर-पूर्व कोने (ईशान कोण) को साफ करके वहां एक साफ चौकी (बाज़ोट) बिछाएं। उस पर सफेद या पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु, महर्षि वेदव्यास और अपने गुरुदेव की तस्वीर या चरण पादुका स्थापित करें। 3.पंचोपचार या षोडशोपचार पूजन:सुबह 07:00 AM के बाद. तस्वीर के सामने शुद्ध घी का दीपक और धूप जलाएं। सभी देवी-देवताओं और गुरुदेव को चंदन, रोली, और अक्षत (चावल) का तिलक लगाएं। उन्हें पीले फूल या फूलों की माला अर्पित करें। 4.भोग और आरती:पूजन के अंत में. गुरुदेव को बेसन के लड्डू, पेड़े या घर में बनी सात्विक खीर का भोग लगाएं। इसके बाद कपूर जलाकर आरती करें। पूजा समाप्त होने के बाद जाने-अनजाने में हुई भूलचूक के लिए क्षमा प्रार्थना करें और सभी में प्रसाद वितरित करें। महर्षि वेदव्यास और गुरु पूर्णिमा का महत्व इस दिन को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन महाभारत, श्रीमद्भागवत और चारों वेदों के संपादक महर्षि वेदव्यास जी का जन्म हुआ था। उन्होंने ही पहली बार मानव जाति को वेदों का विभाजित ज्ञान दिया, इसलिए वे आदिगुरु माने जाते हैं। गुरु केवल वो नहीं हैं जो हमें आध्यात्मिक ज्ञान देते हैं। हमारे माता-पिता, जिन्होंने हमें इस दुनिया में लाया और बोलना-चलना सिखाया, वे हमारे सबसे पहले गुरु हैं। इसके बाद हमारे स्कूल-कॉलेज के शिक्षक और जीवन में सही रास्ता दिखाने वाले मेंटर्स भी गुरु की श्रेणी में आते हैं। Guru Purnima 2026 का यह दिन उन सभी के प्रति कृतज्ञता (Gratitude) व्यक्त करने का सबसे उत्तम अवसर है। इस दिन क्या करें और क्या न करें? अपनी कुंडली में गुरु ग्रह (Jupiter) को मजबूत करने और जीवन में सुख-समृद्धि लाने के लिए इस दिन कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए: क्या करें: अपने माता-पिता और गुरु के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लें। यदि आपके गुरु इस दुनिया में नहीं हैं, तो उनके चित्र के सामने बैठकर उनके दिए मंत्रों का जाप करें। जरूरतमंद लोगों या ब्राह्मणों को पीले अनाज, चने की दाल, पीले वस्त्र या गीता जैसी धार्मिक पुस्तकों का दान करें। विद्यार्थियों को इस दिन अपनी किताबों और पेन की सफाई कर उनका भी सम्मान

A religious banner about Pradosh Vrat featuring Lord Shiva, Goddess Parvati, and Lord Ganesha. It includes Hindi text "प्रदोष व्रत: सम्पूर्ण जानकारी, शुभ मुहूर्त & पूजा विधि" and lists dates for June-December 2026 with contact details of Acharya Sharad Swaroop.
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प्रदोष व्रत क्या है? जानिए जून से दिसंबर 2026 की तिथियां, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

हिंदू सनातन धर्म में भगवान शिव की साधना के लिए कई विशेष दिन बताए गए हैं, लेकिन प्रदोष व्रत को महादेव की कृपा पाने का सबसे अचूक और कल्याणकारी मार्ग माना जाता है। यह व्रत हर महीने के दोनों पक्षों (कृष्ण और शुक्ल पक्ष) की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। यदि आप वर्ष 2026 के मध्य यानी जून 2026 से दिसंबर 2026 के बीच पड़ने वाले प्रदोष व्रतों की योजना बना रहे हैं, तो यह लेख आपके लिए मार्गदर्शक साबित होगा। आइए जानते हैं कि आखिर प्रदोष व्रत क्या है, इसका महत्व क्या है और आने वाले महीनों में इसकी सही तिथियां क्या हैं। प्रदोष व्रत क्या होता है? (What is Pradosh Vrat) ‘प्रदोष’ का शाब्दिक अर्थ है – संध्या काल या रात का आगमन। धार्मिक और खगोलीय दृष्टिकोण से, सूर्यास्त के बाद और रात्रि के प्रारंभ होने के बीच का जो संधिकाल (मिलन का समय) होता है, उसे प्रदोष काल कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार, त्रयोदशी तिथि के दिन इसी प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा की जाती है, इसलिए इसे ‘प्रदोष व्रत’ कहते हैं। इसके पीछे की पौराणिक मान्यता: पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी तिथि और इसी समय (प्रदोष काल) में महादेव ने समुद्र मंथन से निकले भयंकर ‘हलाहल विष’ को अपने कंठ में धारण किया था, जिससे वे ‘नीलकंठ’ कहलाए। विष के प्रभाव को शांत करने के लिए देवताओं ने इस समय शिव जी की स्तुति की थी, जिससे प्रसन्न होकर महादेव ने कैलाश पर्वत पर आनंद तांडव (नृत्य) किया था। मान्यता है कि: प्रदोष काल में भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न और शांत मुद्रा में होते हैं। इस समय वे अपने भक्तों की हर पुकार सुनते हैं और उनके जीवन के सभी दुखों, दारिद्र्य और पापों का नाश कर देते हैं। जून से दिसंबर 2026 की संपूर्ण सूची (Pradosh Vrat List: June to December 2026) वर्ष 2026 के उत्तरार्ध (आधे साल) में आने वाले सभी प्रदोष व्रतों की सही तिथियां इस प्रकार हैं: महीना (2026) व्रत की तिथि और दिन पक्ष और नाम जून 12 जून 2026 (शुक्रवार) ज्येष्ठ कृष्ण प्रदोष (भृगु प्रदोष) 26 जून 2026 (शुक्रवार) ज्येष्ठ शुक्ल प्रदोष जुलाई 11 जुलाई 2026 (शनिवार) आषाढ़ कृष्ण प्रदोष (शनि प्रदोष) 26 जुलाई 2026 (रविवार) आषाढ़ शुक्ल प्रदोष (रवि प्रदोष) अगस्त 10 अगस्त 2026 (सोमवार) श्रावण कृष्ण प्रदोष (सोम प्रदोष – सावन) 24 अगस्त 2026 (सोमवार) श्रावण शुक्ल प्रदोष (सोम प्रदोष) सितंबर 09 सितंबर 2026 (बुधवार) भाद्रपद कृष्ण प्रदोष (बुध प्रदोष) 23 सितंबर 2026 (बुधवार) भाद्रपद शुक्ल प्रदोष अक्टूबर 08 अक्टूबर 2026 (गुरुवार) आश्विन कृष्ण प्रदोष (गुरु प्रदोष) 23 अक्टूबर 2026 (शुक्रवार) आश्विन शुक्ल प्रदोष नवंबर 07 नवंबर 2026 (शनिवार) कार्तिक कृष्ण प्रदोष (शनि प्रदोष) 21 नवंबर 2026 (शनिवार) कार्तिक शुक्ल प्रदोष दिसंबर 06 दिसंबर 2026 (रविवार) मार्गशीर्ष कृष्ण प्रदोष 21 दिसंबर 2026 (सोमवार) मार्गशीर्ष शुक्ल प्रदोष प्रदोष काल का शुभ मुहूर्त (The Best Time for Puja) प्रदोष व्रत की मुख्य पूजा हमेशा शाम के समय की जाती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्यास्त से 45 मिनट पहले और सूर्यास्त के 45 मिनट बाद तक का समय मुख्य प्रदोष काल होता है। सामान्यतः शाम 05:40 से रात 08:20 के बीच का समय महादेव के अभिषेक और पूजन के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। प्रदोष व्रत की सरल और प्रामाणिक पूजा विधि (Puja Vidhi) इस व्रत को रखने और पूजा करने का तरीका बहुत ही सरल और प्रभावशाली है: प्रातः काल की शुरुआत: व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र (सफेद या हल्के रंग के कपड़े पहनना शुभ होता है) धारण करें। व्रत का संकल्प: मंदिर में दीपक जलाकर हाथ में जल लें और कहें: “हे देवाधिदेव महादेव, मैं आज आपकी प्रसन्नता के लिए प्रदोष व्रत रख रहा/रही हूँ, मेरी पूजा स्वीकार करें।” दिनभर का नियम: दिनभर मन ही मन “ॐ नमः शिवाय” का मानसिक जाप करते रहें। इस दिन तामसिक भोजन, क्रोध और झूठ से पूरी तरह दूर रहें। शाम की मुख्य पूजा: प्रदोष काल (शाम) में दोबारा स्नान या हाथ-पैर धोकर स्वच्छ हो जाएं। पूजा स्थान पर उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें। पंचामृत अभिषेक: शिवलिंग पर शुद्ध जल, कच्चा दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें। सामग्री अर्पण: शिव जी को चंदन का तिलक लगाएं। इसके बाद बेलपत्र (बिना कटा-फटा), धतूरा, भांग, अक्षत (साबुत चावल), और सफेद फूल अर्पित करें। माता पार्वती को लाल फूल या श्रृंगार की सामग्री चढ़ाएं। कथा और आरती: घी का दीपक और धूप जलाकर प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें या सुनें। अंत में कपूर से शिव जी की आरती करें और भूल-चूक के लिए क्षमा मांगें। व्रत का पारण: पूजा के बाद आप फलाहार (फल या सात्विक भोजन) ग्रहण कर सकते हैं। पूर्ण पारण अगले दिन सुबह सूर्योदय के बाद किया जाता है। विभिन्न दिनों के प्रदोष व्रत का अलग फल प्रदोष व्रत जिस वार (दिन) को पड़ता है, उसका महत्व और बढ़ जाता है: सोमवार (सोम प्रदोष): मानसिक शांति और सभी इच्छाओं की पूर्ति। मंगलवार (भौम प्रदोष): कर्ज से मुक्ति और मंगल दोष का निवारण। शनिवार (शनि प्रदोष): संतान सुख की प्राप्ति और नौकरी में आ रही बाधाएं दूर होना। रविवार (रवि प्रदोष): अच्छी सेहत, दीर्घायु और समाज में मान-सम्मान। निष्कर्ष (Conclusion) यदि आप जीवन में मानसिक अशांति, आर्थिक तंगी या स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं, तो प्रदोष व्रत का नियमपूर्वक पालन करना आपके जीवन की दिशा बदल सकता है। जून 2026 से शुरू होने वाले इन व्रतों को पूरी श्रद्धा के साथ रखें और महादेव का आशीर्वाद पाएं। ज्योतिषीय परामर्श और कुंडली विश्लेषण के लिए संपर्क करें यदि आप अपने जीवन, करियर, व्यापार, वैवाहिक जीवन या कुंडली में ग्रहों की स्थिति के बारे में विस्तृत और व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्राप्त करना चाहते हैं, तो आप सीधे संपर्क कर सकते हैं। नाम: आचार्य शरद स्वरूप (Acharya Sharad Swarup) व्हाट्सएप / कॉल: +91-9818359075 दैनिक राशिफल, वास्तु टिप्स और आध्यात्मिक जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया से जुड़ें: YouTube: https://www.youtube.com/@BhavishyaNakshatra Instagram: https://www.instagram.com/bhavishyanakshatra/ Facebook: https://www.facebook.com/BhavishyaNakshatra.in/ .

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