Sawan Somvar Vrat Katha 2026: जानिए सावन सोमवार की तिथि सूची और व्रत कथा
सावन का पवित्र महीना भगवान भोलेनाथ की भक्ति के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। मान्यता है कि जो भी भक्त सावन के सोमवार का व्रत पूरी श्रद्धा से रखते हैं, शिव जी उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। आइए जानते हैं इस साल की sawan somvar list 2026, पूजा विधि और पावन sawan somvar vrat katha।
Sawan Somvar List 2026 (तिथियों की सूची)
इस वर्ष सावन के महीने में कुल 5 सोमवार आ रहे हैं:
पहला सावन सोमवार: 20 जुलाई 2026
दूसरा सावन सोमवार: 27 जुलाई 2026
तीसरा सावन सोमवार: 03 अगस्त 2026
चौथा सावन सोमवार: 10 अगस्त 2026
पांचवां सावन सोमवार: 17 अगस्त 2026
सावन सोमवार पूजा विधि (Puja Vidhi)
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें।
घर के मंदिर में दीप जलाकर व्रत का संकल्प लें।
शिवलिंग पर गंगाजल, कच्चा दूध, बेलपत्र, धतूरा और चंदन अर्पित करें।
पूजा के समय sawan somvar vrat katha का पाठ अवश्य करें या सुनें।
अंत में आरती करें और भोलेनाथ को भोग लगाकर पूरे दिन “ॐ नमः शिवाय” का जाप करें।
पावन सावन सोमवार व्रत कथा (Sawan Somvar Vrat Katha)
पौराणिक कथा के अनुसार, एक धनी व्यापारी था जिसके पास सब कुछ था, लेकिन संतान न होने के कारण वह दुखी रहता था। पुत्र की कामना के लिए वह हर सोमवार को पूरी श्रद्धा से भगवान शिव का व्रत रखता था।
उसकी भक्ति देखकर माता पार्वती के अनुरोध पर भगवान शिव ने उसे पुत्र प्राप्ति का वरदान तो दिया, लेकिन कहा कि उस बालक की आयु केवल 12 वर्ष होगी। समय आने पर व्यापारी के घर एक सुंदर पुत्र का जन्म हुआ। जब बालक 11 वर्ष का हुआ, तो उसे शिक्षा के लिए काशी भेजा गया। रास्ते में एक नगर के राजा की पुत्री से उसका विवाह भी संपन्न हो गया।
जब बालक ठीक 12 वर्ष का हुआ, तो काशी में एक यज्ञ के दौरान उसके प्राण निकल गए। उसके मामा का विलाप सुनकर वहां से गुजर रहे भगवान शिव और माता पार्वती अत्यंत द्रवित हो उठे। माता पार्वती के बार-बार आग्रह करने पर भोलेनाथ ने उस बालक को दोबारा जीवित कर दिया।
बालक अपनी पत्नी के साथ सकुशल घर लौटा। व्यापारी समझ गया कि यह सब सोमवार व्रत का ही प्रताप है। तभी से समाज में sawan somvar vrat katha और इस व्रत का महत्व अत्यधिक बढ़ गया। जो भी भक्त इस पावन sawan somvar vrat katha को सुनता है, भोलेनाथ उसके सारे संकट दूर कर देते हैं।
व्रत के मुख्य नियम
व्रत में तामसिक भोजन (लहसुन, प्याज, मांस-मदिरा) का सेवन बिल्कुल न करें।
शाम की आरती के बाद आप सेंधा नमक का उपयोग कर फलाहार कर सकते हैं।
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