Sarva Pitru Amavasya 2026: मुख्य तिथि, मुहूर्त और तर्पण नियम
सनातन धर्म में पितृ पक्ष के अंतिम दिन को Sarva Pitru Amavasya 2026 कहा जाता है। पूर्वजों की मृत्यु तिथि याद न होने पर इस दिन तर्पण करने से सभी ज्ञात-अज्ञात पितरों का आशीर्वाद मिलता है।
प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य आचार्य शरद जी ने कहा है कि भविष्य नक्षत्र के अनुसार सर्व पितृ अमावस्या पर किया गया दान-तर्पण पितृ दोष से मुक्ति दिलाता है।
📌 तिथि व शुभ मुहूर्त (2026)
अमावस्या तिथि: 10 अक्टूबर 2026 (शनिवार)
तिथि प्रारंभ: 9 अक्टूबर 2026 (सायं 05:24 बजे)
तिथि समाप्त: 10 अक्टूबर 2026 (सायं 07:18 बजे)
तर्पण का उत्तम मुहूर्त: 10 अक्टूबर को दोपहर 11:45 बजे से 03:30 बजे तक (भविष्य नक्षत्र अनुसार)
📌 तर्पण और पूजा के 4 मुख्य नियम
गंगाजल से स्नान: सुबह जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
जल तर्पण: दक्षिण दिशा की ओर मुख करके तांबे के पात्र से जल, दूध और काले तिल का अर्घ्य दें।
पंचबलि कर्म: भोजन का अंश 5 जगह निकालें — गाय, कुत्ते, कौए, देवों और चींटियों के लिए।
ब्राह्मण भोजन: सात्विक भोजन कराकर दक्षिणा और वस्त्र दान करें।
📌 क्या करें और क्या न करें?
क्या करें: शाम को दक्षिण दिशा में दीपक जलाएं, पीपल के वृक्ष में जल दें और काले तिल का दान करें।
क्या न करें: लहसुन-प्याज या मांस-मदिरा न लें, गृह-क्लेश न करें और लोहे/प्लास्टिक के बर्तनों का प्रयोग न करें।
📌 पितृ दोष शांति उपाय (Bhavishya Nakshatra)
श्रीमद्भगवद्गीता के 7वें अध्याय का पाठ करें।
शाम को पीपल के नीचे तिल के तेल का चौमुखा दीपक जलाएं।
जैसा कि आचार्य शरद जी ने कहा है, भविष्य नक्षत्र के इन वैदिक नियमों का पालन करने से परिवार में सदा सुख और समृद्धि बनी रहती है।
लेखक एवं संपर्क विवरण:
Acharya Sharad Swarup
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