Janmashtami 2026: 4 या 5 सितंबर कब है जन्माष्टमी? जानें सही मुहूर्त
भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव यानी जन्माष्टमी का त्योहार हर साल भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में Janmashtami 2026 की सही तारीख को लेकर संशय बना हुआ है कि व्रत 4 सितंबर को रखा जाएगा या 5 सितंबर को। आइए जानते हैं सही तारीख, पूजन मुहूर्त और व्रत पारण का सही समय।
Janmashtami 2026: 4 या 5 सितंबर कब है?
पंचांग के अनुसार, अष्टमी तिथि का समय इस प्रकार रहेगा:
अष्टमी तिथि प्रारंभ: 4 सितंबर 2026 को दोपहर 12:15 बजे से
अष्टमी तिथि समाप्त: 5 सितंबर 2026 को दोपहर 01:40 बजे तक
भगवान कृष्ण का जन्म मध्यरात्रि (रात 12 बजे) में हुआ था। चूंकि 4 सितंबर की रात को अष्टमी तिथि व्याप्य रहेगी, इसलिए गृहस्थ परंपरा के अनुसार Janmashtami 2026 का मुख्य पर्व और व्रत 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को ही रखा जाएगा। वहीं, वैष्णव संप्रदाय के श्रद्धालु उदयातिथि के अनुसार 5 सितंबर को जन्मोत्सव मनाएंगे।
पूजन मुहूर्त और व्रत पारण का समय
जन्माष्टमी की पूजा मध्यरात्रि निशिता काल में की जाती है:
पूजा का शुभ मुहूर्त: 4 सितंबर की रात 11:57 बजे से रात 12:43 बजे तक (कुल अवधि: 46 मिनट)
रोहिणी नक्षत्र: 4 सितंबर शाम 05:30 बजे से 5 सितंबर शाम 07:15 बजे तक
व्रत पारण का समय: गृहस्थ श्रद्धालु मध्यरात्रि पूजा और आरती के बाद माखन-मिश्री का प्रसाद ग्रहण करके व्रत खोल सकते हैं। इसके अलावा 5 सितंबर को सुबह सूर्योदय (06:05 बजे) के बाद भी पारण किया जा सकता है।
आसान पूजन विधि
संकल्प: Janmashtami 2026 के दिन सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें।
अभिषेक व श्रृंगार: रात 11:57 बजे बाल गोपाल का पंचामृत और गंगाजल से अभिषेक करें। सुंदर वस्त्र, मुकुट और बांसुरी से श्रृंगार करें।
भोग व आरती: माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी और तुलसी दल अर्पित करें। आरती गाकर लड्डू गोपाल को झूला झुलाएं।
Janmashtami 2026 का यह पावन पर्व आपके जीवन में सुख और समृद्धि लाए।
लेखक एवं ज्योतिषीय परामर्श:
आचार्य शरद स्वरूप (Acharya Sharad Swarup)
भविष्य नक्षत्र (Bhavishya Nakshatra)
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