देवउठनी एकादशी 2026: तिथि, मुहूर्त एवं पूजा विधि
देवउठनी एकादशी 2026 (Devuthani Gyaras या प्रबोधनी एकादशी) सनातन धर्म का अत्यंत पवित्र पर्व है। आषाढ़ मास से चार महीने की योगनिद्रा (चातुर्मास) के बाद भगवान श्री हरि विष्णु इसी दिन जागते हैं।
जैसा कि आचार्य शरद जी ने कहा है, “देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के जागते ही सम्पूर्ण ब्रह्मांड में शुभ और सात्विक ऊर्जा का पुनः संचार होता है और सभी मांगलिक कार्य प्रारंभ हो जाते हैं।”
भविष्य नक्षत्र के पाठकों के लिए देवउठनी एकादशी 2026 की मुख्य जानकारियाँ संक्षेप में नीचे दी गई हैं:
1. देवउठनी एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त एवं तिथि
व्रत तिथि: 21 नवंबर 2026 (शनिवार)
एकादशी तिथि प्रारंभ: 20 नवंबर 2026, दोपहर 01:25 बजे
एकादशी तिथि समाप्त: 21 नवंबर 2026, दोपहर 03:10 बजे
व्रत पारण (Parana) समय: 22 नवंबर 2026, प्रातः 06:49 बजे से सुबह 08:56 बजे तक
2. संक्षिप्त पूजा विधि
संकल्प: सुबह स्नान के बाद पीले वस्त्र पहनें और भगवान विष्णु का ध्यान कर व्रत का संकल्प लें।
मंडप व चरण: पूजा स्थान पर चूने और गेरू से विष्णु जी के चरण कमल बनाएं और गन्ने का मंडप तैयार करें।
अर्पण: भगवान विष्णु को पीले फूल, मौसमी फल (सिंघाड़ा, शकरकंद, बेर), तुलसी दल और पंचामृत अर्पित करें।
देव जगाना: शाम के समय परिवार के साथ घंटी या मंजीरे बजाकर भगवान को योगनिद्रा से जगाएं।
आरती: एकादशी व्रत कथा सुनें या पढ़ें और अंत में भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की आरती करें।
3. तुलसी विवाह के नियम
एकादशी की शाम को तुलसी जी के गमले को सजाकर गन्ने का मंडप बनाएं।
माता तुलसी को लाल चुनरी व शृंगार सामग्री चढ़ाएं।
शालिग्राम जी (भगवान विष्णु) को तुलसी जी के समीप स्थापित कर गठबंधन करें।
तुलसी-शालिग्राम की 7 बार परिक्रमा करें। आचार्य शरद जी ने कहा है कि तुलसी विवाह कराने से कन्यादान के समान पुण्य मिलता है।
4. मुख्य नियम व सावधानियां
चावल वर्जित: एकादशी के दिन चावल खाना पूरी तरह वर्जित है।
सात्विक आहार: दशमी की रात से ही लहसुन, प्याज और तामसिक भोजन से दूर रहें।
तुलसी दल: एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते न तोड़ें (एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें)।
दान-पुण्य: भविष्य नक्षत्र के अनुसार, इस दिन तिल, गन्ने, अन्न और वस्त्रों का दान करना विशेष फलदायी होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. देवउठनी एकादशी 2026 कब है?
Ans: 21 नवंबर 2026 (शनिवार) को।
Q2. मांगलिक कार्य कब से शुरू होंगे?
Ans: देवउठनी एकादशी के दिन से ही विवाह, मुंडन और गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य शुरू हो जाते हैं।
Q3. व्रत पारण कब करें?
Ans: 22 नवंबर 2026 को सुबह 06:49 से 08:56 बजे के बीच।
लेखक एवं ज्योतिषीय परामर्श:
Acharya Sharad Swarup
(Bhavishya Nakshatra)
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