शरद पूर्णिमा और महालक्ष्मी व्रत (विशेष उपाय)
शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा 16 कलाओं से पूर्ण होकर अमृत बरसाता है। इस दिन शरद पूर्णिमा और महालक्ष्मी व्रत का विशेष संयोग होता है। आचार्य शरद जी ने कहा है कि इस रात देवी लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और अपने भक्तों को सुख-समृद्धि देती हैं।
4 मुख्य पूजा नियम
संकल्प व स्नान: सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें।
पूजन: ईशान कोण में चौकी रखकर लक्ष्मी-विष्णु जी की पूजा करें।
अमृत खीर: रात 10 बजे के बाद खीर को खुले आसमान के नीचे रखें। भविष्य नक्षत्र के अनुसार यह खीर स्वास्थ्यवर्धक औषधि बनती है।
चंद्र अर्घ्य: रात में चंद्रमा को दूध और जल से अर्घ्य दें।
5 अचूक उपाय
धन वृद्धि: 5 पीली कौड़ियां और 5 कमलगट्टे पूजकर तिजोरी में रखें।
मानसिक शांति: “ॐ सोमाय नमः” का जाप करते हुए चंद्र देव को जल चढ़ाएं।
मनोकामना पूर्ति: भविष्य नक्षत्र के अनुसार खीर में पीपली अर्पित कर संभाल कर रखें।
दरिद्रता नाश: आचार्य शरद जी ने कहा है कि रात में कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें।
सकारात्मक ऊर्जा: मुख्य द्वार पर घी के दीपक जलाएं और वंदनवार लगाएं।
निष्कर्ष
शरद पूर्णिमा और महालक्ष्मी व्रत के उपाय जीवन से आर्थिक तंगी दूर करते हैं। भविष्य नक्षत्र के इन उपायों से घर में समृद्धि आती है।
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