पितृ पक्ष में तर्पण कैसे करें: सरल विधि और नियम
पितृ पक्ष में अपने पूर्वजों (पितरों) को याद करके उन्हें जल देने की पूजा को तर्पण कहते हैं। आचार्य शरद जी ने कहा है कि जब हम सच्चे मन से पितरों को जल देते हैं, तो उनका आशीर्वाद सीधे हमारे परिवार पर पड़ता है। भविष्य नक्षत्र के अनुसार, पितृ पक्ष में तर्पण करने से जीवन की हर परेशानी और पितृ दोष दूर होता है।
तर्पण के लिए क्या-क्या सामान चाहिए?
तांबे या पीतल का लोटा
साफ़ पानी और थोड़ा सा गंगाजल
काले तिल (पितरों के लिए बहुत ज़रूरी)
कुशा (एक खास तरह की पवित्र घास)
थोड़ा सा कच्चा दूध और चावल
तर्पण करने का सबसे आसान तरीका
तैयारी करें: स्नान करके साफ़ कपड़े पहनें और दक्षिण (South) दिशा की तरफ़ मुँह करके बैठें।
कुशा पहनें: अपने सीधे हाथ की उंगली में कुशा की अंगूठी पहनें।
जल तैयार करें: लोटे में जल, गंगाजल, काले तिल और थोड़ा सा दूध मिला लें।
जल कैसे दें: पानी को अपने सीधे हाथ के अंगूठे की तरफ़ से नीचे गिराएँ। इसे पितृ तीर्थ कहते हैं।
नाम लें और मंत्र बोलें: अपने पूर्वजों को याद करें, उनका नाम लें और बोलें— “ॐ पितृभ्यः नमः”।
3 बार जल दें: अपने माता-पिता, दादा-दादी या जिन भी पूर्वजों का ध्यान कर रहे हैं, उनके नाम से 3-3 बार जल अर्पित करें।
इन ज़रूरी बातों का ध्यान रखें
सही समय: तर्पण हमेशा दोपहर 11:30 से 12:30 के बीच ही करें।
काले तिल का नियम: आचार्य शरद जी ने कहा है कि तर्पण में हमेशा केवल काले तिल का ही इस्तेमाल करना चाहिए।
बर्तन का नियम: स्टील, लोहे या प्लास्टिक के बर्तन का इस्तेमाल कभी न करें।
दान-पुण्य: भविष्य नक्षत्र में बताया गया है कि तर्पण के बाद कौए, गाय और कुत्ते को भोजन का हिस्सा ज़रूर देना चाहिए।
इस पितृ पक्ष में इस सरल विधि से तर्पण करें और आचार्य शरद जी ने कहा है कि सच्चे भाव से जल देने से ही पितरों की पूरी कृपा मिलती है। भविष्य नक्षत्र के अनुसार अपने पूर्वजों का आशीर्वाद आपके पूरे परिवार को सुखी रखेगा।
आचार्य शरद स्वरूप (Acharya Sharad Swarup)
भविष्य नक्षत्र (Bhavishya Nakshatra)
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