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Vasant Panchami 2026
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Vasant Panchami 2026: तिथि, पूजा विधि और महत्व

Vasant Panchami 2026 भारत के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक पर्वों में से एक है। यह पर्व बसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक माना जाता है और मुख्य रूप से माँ सरस्वती की आराधना के लिए जाना जाता है। यह दिन विद्या, बुद्धि, कला, संगीत और ज्ञान को समर्पित होता है। विद्यार्थियों, कलाकारों और विद्वानों के लिए वसंत पंचमी का विशेष महत्व होता है। Vasant Panchami 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त हिंदू पंचांग के अनुसार, Vasant Panchami 2026 माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाएगी। इस दिन सुबह से ही माँ सरस्वती की पूजा का विशेष महत्व होता है। ✨ विशेष मान्यता:वसंत पंचमी के दिन विद्यारंभ, पुस्तक पूजन और नए कार्य की शुरुआत अत्यंत शुभ मानी जाती है। वसंत पंचमी का धार्मिक महत्व वसंत पंचमी का सीधा संबंध माँ सरस्वती से है, जिन्हें ज्ञान, वाणी और बुद्धि की देवी माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन माँ सरस्वती का प्राकट्य हुआ था। इस कारण भक्त पीले वस्त्र धारण कर उनकी पूजा करते हैं। पीला रंग समृद्धि, ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक है। खेतों में खिलते सरसों के पीले फूल प्रकृति में नई शुरुआत और सौंदर्य का संदेश देते हैं। Vasant Panchami 2026 और बसंत ऋतु का संबंध Vasant Panchami 2026 से बसंत ऋतु का आरंभ माना जाता है। यह ऋतु न अधिक ठंडी होती है और न अधिक गर्म, इसलिए इसे सबसे सुखद मौसम कहा जाता है। इस समय: पेड़ों पर नई कोपलें आती हैं फूल खिलने लगते हैं वातावरण में उत्साह और उमंग भर जाती है इसी कारण बसंत ऋतु को प्रेम, सौंदर्य और नवजीवन की ऋतु कहा जाता है। Vasant Panchami 2026 की पूजा विधि वसंत पंचमी के दिन माँ सरस्वती की पूजा सरल लेकिन अत्यंत फलदायी मानी जाती है। पूजा विधि: सुबह स्नान कर स्वच्छ पीले या सफेद वस्त्र पहनें पूजा स्थान पर माँ सरस्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें पीले फूल, हल्दी, केसर और पीले फल अर्पित करें पुस्तकें, पेन और वाद्य यंत्र माँ के चरणों में रखें “ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः” मंत्र का जाप करें पूजा के बाद प्रसाद वितरित करें इस दिन पढ़ाई से जुड़ी वस्तुओं का पूजन करना विशेष शुभ माना जाता है। विद्यार्थियों के लिए Vasant Panchami 2026 का महत्व Vasant Panchami 2026 विद्यार्थियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण दिन होता है। इस दिन: बच्चों का विद्यारंभ संस्कार किया जाता है पढ़ाई में एकाग्रता और सफलता की कामना की जाती है परीक्षा और करियर में उन्नति के लिए माँ सरस्वती का आशीर्वाद लिया जाता है कई विद्यालय और शिक्षण संस्थान इस अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित करते हैं। वसंत पंचमी पर क्या करें और क्या न करें ✔️ क्या करें: पीले वस्त्र पहनें माँ सरस्वती की पूजा करें शिक्षा और कला से जुड़े कार्य शुरू करें सकारात्मक सोच रखें ❌ क्या न करें: नकारात्मक विचारों से बचें झूठ और वाणी दोष से दूर रहें अपवित्र अवस्था में पूजा न करें Vasant Panchami 2026 का सांस्कृतिक महत्व भारत के विभिन्न राज्यों में Vasant Panchami 2026 अलग-अलग तरीकों से मनाई जाती है। कहीं पतंग उड़ाई जाती है, तो कहीं सांस्कृतिक कार्यक्रम, कवि सम्मेलन और संगीत समारोह आयोजित किए जाते हैं। यह पर्व हमें यह संदेश देता है कि ज्ञान और संस्कृति ही समाज की वास्तविक शक्ति हैं। निष्कर्ष Vasant Panchami 2026 केवल एक पर्व नहीं, बल्कि ज्ञान, सकारात्मकता और नई शुरुआत का प्रतीक है। यह दिन हमें शिक्षा, विवेक और संस्कारों के महत्व का बोध कराता है। माँ सरस्वती की कृपा से जीवन में सफलता, शांति और समृद्धि प्राप्त होती है। इस वसंत पंचमी पर ज्ञान के मार्ग पर चलने का संकल्प लें और अपने जीवन को उज्ज्वल बनाएं। ज्योतिषीय संदेश Vasant Panchami 2026 की तिथि, पूजा विधि, धार्मिक महत्व और बसंत ऋतु का आध्यात्मिक संदेश विस्तार से पढ़ें। यदि आप वसंत पंचमी 2026 के ज्योतिषीय प्रभाव, माँ सरस्वती की कृपा, बसंत ऋतु के आध्यात्मिक संदेश और अपनी कुंडली पर इसके प्रभाव को विस्तार से समझना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए उपयोगी है।Acharya Sharad Swaroop Ji से संपर्क करें।संपर्क नंबर: +91-9818359075

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मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है? – ज्योतिषीय दृष्टिकोण से महत्व

ज्योतिष शास्त्र में मकर संक्रांति को केवल एक पर्व नहीं, बल्कि सूर्य देव के शुभ परिवर्तन और ब्रह्मांडीय ऊर्जा के संतुलन का विशेष दिवस माना गया है। यह वह समय होता है जब प्रकृति, ग्रह और मानव जीवन एक नई दिशा की ओर अग्रसर होते हैं। अक्सर लोगों के मन में यह प्रश्न होता है कि मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है, पतंग उड़ाने, तिल-गुड़ बाँटने और पवित्र नदियों में स्नान करने का क्या आध्यात्मिक कारण है। आइए, इस पावन पर्व के पीछे छिपे गूढ़ ज्योतिषीय रहस्यों को समझते हैं। मकर संक्रांति क्या है? – शास्त्रों के अनुसार मकर संक्रांति हिंदू पंचांग के उन विशिष्ट पर्वों में से एक है, जो चंद्रमा पर नहीं बल्कि सूर्य की गति पर आधारित होता है।“मकर” का अर्थ है मकर राशि (Capricorn) और “संक्रांति” का अर्थ है सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश। इस दिन सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं।साल 2026 में मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जाएगी। ज्योतिष के अनुसार, सूर्य का यह गोचर अत्यंत शुभ, सकारात्मक और फलदायी माना जाता है। उत्तरायण का आरंभ: मकर संक्रांति का सबसे बड़ा ज्योतिषीय कारण ज्योतिष शास्त्र में मकर संक्रांति का सबसे बड़ा महत्व उत्तरायण काल की शुरुआत से जुड़ा है। जब सूर्य दक्षिण दिशा से उत्तर दिशा की ओर गति करता है, तो इसे उत्तरायण कहा जाता है। यह काल— देवताओं का दिन शुभ कार्यों की शुरुआत आत्मिक जागरण का समय माना जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि उत्तरायण में किए गए— दान तप जप स्नान अक्षय पुण्य प्रदान करते हैं। इसी कारण मकर संक्रांति को महापुण्य काल कहा गया है। सूर्य का प्रभाव और मानव जीवन ज्योतिष के अनुसार सूर्य— ☀️ आत्मा का कारक☀️ आत्मबल और तेज का प्रतीक☀️ स्वास्थ्य और नेतृत्व शक्ति का ग्रह है। मकर संक्रांति के बाद सूर्य की किरणें पृथ्वी पर अधिक प्रभावी हो जाती हैं, जिससे— मानसिक ऊर्जा बढ़ती है आलस्य और नकारात्मकता कम होती है जीवन में नई शुरुआत की प्रेरणा मिलती है इसीलिए इस दिन सूर्य देव की पूजा का विशेष महत्व है। मकर संक्रांति और फसल: कर्म और फल का सिद्धांत ज्योतिष में मकर संक्रांति को कर्म और फल के संतुलन का प्रतीक भी माना गया है। इस समय तक किसानों की फसल पककर तैयार हो जाती है। यह दर्शाता है कि— 🌾 परिश्रम का फल अवश्य मिलता है🙏 प्रकृति के प्रति कृतज्ञता आवश्यक है तिल और गुड़ का सेवन ज्योतिषीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।तिल शनि दोष शांति में सहायक माना जाता है और गुड़ सूर्य की ऊर्जा को संतुलित करता है। मकर संक्रांति पर दान-स्नान का महत्व शास्त्रों के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन— गंगा, यमुना या किसी पवित्र नदी में स्नान तिल, गुड़, वस्त्र और अन्न का दान विशेष पुण्य प्रदान करता है। कहा जाता है कि इस दिन किया गया दान सूर्य और शनि दोनों ग्रहों की कृपा दिलाता है और कुंडली के कई दोषों को शांत करता है। मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है? – ज्योतिषीय निष्कर्ष ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मकर संक्रांति मनाने के मुख्य कारण हैं: 1️⃣ सूर्य के उत्तरायण होने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार2️⃣ ग्रहों के संतुलन से जीवन में स्थिरता और उन्नति3️⃣ कर्म फल सिद्धांत के अनुसार परिश्रम की पूर्णता यह पर्व हमें सिखाता है कि— 🌞 अंधकार के बाद प्रकाश निश्चित है🌞 हर परिवर्तन जीवन को नई दिशा देता है ज्योतिषीय संदेश मकर संक्रांति हमें यह स्मरण कराती है कि जब सूर्य की दिशा बदल सकती है, तो मनुष्य का भाग्य भी बदल सकता है—बस सही समय, सही कर्म और सही मार्गदर्शन आवश्यक है। यदि आप मकर संक्रांति 2026 के ज्योतिषीय प्रभाव, उत्तरायण काल के लाभ और अपनी कुंडली पर सूर्य गोचर के असर को विस्तार से समझना चाहते हैं, तोAcharya Sharad Swaroop Ji से संपर्क करें।संपर्क नंबर: +91-9818359075

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2026 में सभी 12 राशियों के लिए शुभ और सौभाग्यशाली महीने

2026 में सभी राशियों के लिए शुभ महीने जानना इसलिए ज़रूरी है क्योंकि यह वर्ष ज्योतिष के अनुसार बड़े बदलाव और कर्म फल का संकेत देता है। शनि और वरुण ग्रह के गोचर के कारण हर राशि के लिए कुछ विशेष महीने अत्यंत भाग्यशाली सिद्ध होंगे, जबकि कुछ समय सावधानी की मांग करेंगे। इस Horoscope 2026 ब्लॉग में हम सभी 12 राशियों के लिए सबसे शुभ और लकी महीनों की जानकारी दे रहे हैं। साल 2026 सभी 12 राशियों के लिए एक बड़ा बदलाव लेकर आने वाला साल है। यह साल ऐसा मोड़ लेकर आएगा, जो जीवन की दिशा ही बदल सकता है। कुछ लोगों के लिए यह वर्ष बड़ी सफलता और उन्नति का संकेत देगा, जबकि कुछ के लिए यह भावनात्मक सहनशक्ति और धैर्य की कड़ी परीक्षा बनेगा। 2026 में जैसे ही शनि (Shani) और वरुण (Neptune) ग्रह मेष राशि में गोचर करेंगे, वैसे ही सभी राशियों के करियर, आर्थिक स्थिति, रिश्तों और आत्मिक विकास में गहरे प्रभाव देखने को मिलेंगे। हर राशि पर इन ग्रहों का प्रभाव अलग-अलग होगा। किसी के लिए कुछ महीने अत्यंत शुभ सिद्ध होंगे, तो किसी को कुछ समय विशेष सावधानी बरतनी होगी। आइए जानते हैं 2026 में सभी 12 राशियों के शुभ और चुनौतीपूर्ण महीने, ताकि आप पहले से ही सही दिशा में कदम बढ़ा सकें। 2026 में सभी राशियों के लिए शुभ और अशुभ महीने ज्योतिष के अनुसार, 2026 एक ऐसा वर्ष है जो आपको पुराने अध्यायों को बंद कर, जीवन के नए स्तर की ओर ले जाएगा। ♈ मेष राशि (Aries) मेष राशि वालों के लिए 2026 नेतृत्व, आत्मनिर्भरता और उद्यमिता का वर्ष रहेगा। शनि और वरुण का आपके ही राशि में प्रवेश आपको बड़ी ज़िम्मेदारियाँ देगा। शुभ महीने: जून से अक्टूबर – करियर और आत्मविश्वास में वृद्धिचुनौतीपूर्ण समय: पूरा वर्ष आत्म-संयम और धैर्य की मांग करेगा ♌ सिंह राशि (Leo) सिंह राशि वालों के लिए 2026 अपेक्षाकृत सकारात्मक और सौभाग्यशाली रहेगा। प्रेम और भाग्य दोनों का साथ मिलेगा। शुभ महीने: जनवरी से जून – प्रेम, रचनात्मकता और अवसरचुनौतीपूर्ण महीने: जुलाई से दिसंबर – स्वास्थ्य और खर्चों पर नियंत्रण रखें ♐ धनु राशि (Sagittarius) धनु राशि के लिए यह वर्ष अत्यधिक उतार-चढ़ाव वाला रहेगा, लेकिन आत्म-विकास के लिए यह समय अत्यंत महत्वपूर्ण होगा। शुभ महीने: वर्ष का पहला भाग – शिक्षा, कर्ज मुक्ति और योजना निर्माणचुनौतीपूर्ण समय: दूसरा भाग – स्वास्थ्य और भावनात्मक संतुलन आवश्यक ♉ वृषभ राशि (Taurus) वृषभ राशि वालों के लिए 2026 अतीत से सीख लेकर आगे बढ़ने का समय है। शुभ महीने: जून तक – धन संचय और निवेश के लिए अनुकूलचुनौतीपूर्ण महीना: अक्टूबर – शुक्र वक्री होने से पुराने रिश्ते और मुद्दे उभर सकते हैं ♍ कन्या राशि (Virgo) कन्या राशि के जातकों के लिए 2026 निर्णायक बदलावों का वर्ष रहेगा, विशेषकर करियर और धन के क्षेत्र में। शुभ महीने: वर्ष का दूसरा भाग – नेटवर्किंग, प्रेम और विवाह योगचुनौतीपूर्ण महीने: मार्च और सितंबर – ग्रहण के कारण बड़े फैसले लेने पड़ सकते हैं ♑ मकर राशि (Capricorn) मकर राशि वालों के लिए 2026 संघर्ष और सफलता दोनों का संतुलन लेकर आएगा। शुभ महीने: जून के बाद – विवाह और प्रेम संबंधों में स्थिरताचुनौतीपूर्ण समय: वर्ष की शुरुआत – कार्यक्षेत्र में प्रतिस्पर्धा ♊ मिथुन राशि (Gemini) मिथुन राशि के लिए 2026 स्थिरता और संतुलन का वर्ष रहेगा। शुभ महीना: फरवरी – प्रेम जीवन में मधुरता और आर्थिक लाभचुनौतीपूर्ण समय: पुरानी प्रोफेशनल समस्याएँ समाधान मांगेंगी ♎ तुला राशि (Libra) तुला राशि वालों को 2026 में भावनाओं और विवेक के बीच संतुलन बनाकर चलना होगा। शुभ महीने: अप्रैल से सितंबर – भाग्य से जुड़े रिश्ते और प्रेम योगचुनौतीपूर्ण समय: पूरे वर्ष – संवाद की कमी से रिश्तों में तनाव संभव ♒ कुंभ राशि (Aquarius) कुंभ राशि वालों के लिए 2026 आर्थिक अनुशासन सिखाने वाला वर्ष रहेगा। शुभ समय: वर्ष की पहली तिमाही – बजट और भविष्य की योजनाविशेष शुभ महीना: अक्टूबर – फ्रीलांस और कंसल्टिंग से लाभचुनौतीपूर्ण महीने: फरवरी और अगस्त – ग्रहण के कारण मानसिक दबाव ♋ कर्क राशि (Cancer) कर्क राशि के लिए 2026 पुनर्निर्माण और आत्म-उत्थान का वर्ष है। शुभ महीना: जून – आत्मविश्वास, पहचान और अवसरदूसरा शुभ समय: वर्ष का दूसरा भाग – संपत्ति और भरोसेमंद रिश्तेचुनौतीपूर्ण समय: वर्ष का पहला भाग – धैर्य और संयम आवश्यक ♏ वृश्चिक राशि (Scorpio) वृश्चिक राशि वालों को 2026 में उनके प्रयासों का फल अवश्य मिलेगा। शुभ समय: मार्च के बाद – आर्थिक स्थिति में सुधारविशेष शुभ महीना: अक्टूबर – मान-सम्मान और पहचानचुनौतीपूर्ण समय: वर्ष की शुरुआत और वर्षांत में सतर्कता जरूरी ♓ मीन राशि (Pisces) मीन राशि वालों के लिए 2026 कर्म फल और आध्यात्मिक जागरण का वर्ष होगा। शुभ समय: मार्च के बाद – प्रेम संबंधों में गहराईचुनौतीपूर्ण समय: पहले छह महीने – धन और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दें अंतिम संदेश 2026 जीवन में नए अध्याय की शुरुआत का संकेत देता है। यह वर्ष आपको सिखाएगा कि कब धैर्य रखना है और कब साहस के साथ आगे बढ़ना है। यदि आप 2026 में अपनी राशि के अनुसार शुभ और भाग्यशाली महीनों, करियर, धन और जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण समय को गहराई से समझना चाहते हैं, तोAcharya Sharad Swaroop Ji से संपर्क करें।संपर्क नंबर: +91-9818359075

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नवरात्रि के नौ रूप और आपका राशि फल

नवरात्रि का पर्व शक्ति, साधना और श्रद्धा का प्रतीक है। नौ दिनों तक माँ दुर्गा के नौ रूपों की उपासना की जाती है। हर देवी का एक विशिष्ट ऊर्जा केंद्र होता है जो जीवन के अलग-अलग पहलुओं को प्रभावित करता है।ज्योतिष के अनुसार, प्रत्येक राशि का संबंध माँ दुर्गा के किसी न किसी रूप से होता है। इन रूपों की सही पूजा करने से जीवन में सफलता, शांति और सकारात्मकता आती है। राशि अनुसार नौ रूप और उनके प्रभाव 1. मेष राशि – माँ शैलपुत्री मेष राशि के जातक ऊर्जावान और नेतृत्व गुण वाले होते हैं। माँ शैलपुत्री की उपासना से साहस और आत्मविश्वास बढ़ता है।उपाय: लाल फूल और चंदन से पूजा करें। 2. वृषभ राशि – माँ ब्रह्मचारिणी शांति और स्थिरता की प्रतीक। माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा वृषभ राशि वालों को मानसिक बल और धैर्य देती है।उपाय: सफेद वस्त्र पहनें और दूध का भोग लगाएँ। 3. मिथुन राशि – माँ चंद्रघंटा माँ चंद्रघंटा शांति और सामंजस्य का प्रतीक हैं। मिथुन राशि वालों के लिए यह देवी मानसिक संतुलन और आत्मबल बढ़ाती हैं।उपाय: दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। 4. कर्क राशि – माँ कूष्मांडा माँ कूष्मांडा जीवन में नई ऊर्जा और सफलता का संचार करती हैं। कर्क राशि वालों के लिए यह देवी करियर में उन्नति लाती हैं।उपाय: नारियल का भोग लगाएँ और मंदिर में दीपक जलाएँ। 5. सिंह राशि – माँ स्कंदमाता सिंह राशि वाले स्वाभाव से नेतृत्वकारी होते हैं। माँ स्कंदमाता उनकी प्रतिष्ठा और मान-सम्मान में वृद्धि करती हैं।उपाय: पीले फूल और गुड़ का प्रसाद चढ़ाएँ। 6. कन्या राशि – माँ कात्यायनी माँ कात्यायनी विवाह और संबंधों की देवी हैं। कन्या राशि वालों के लिए ये प्रेम और सामंजस्य लाती हैं।उपाय: गुलाबी वस्त्र पहनें और माँ को सुगंधित पुष्प चढ़ाएँ। 7. तुला राशि – माँ कालरात्रि माँ कालरात्रि नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करती हैं। तुला राशि के जातकों के लिए ये भय और संकटों से मुक्ति देती हैं।उपाय: तिल के तेल का दीपक जलाएँ। 8. वृश्चिक राशि – माँ महागौरी माँ महागौरी पवित्रता और शांति का प्रतीक हैं। वृश्चिक राशि वालों को मानसिक स्थिरता और पारिवारिक सुख प्राप्त होता है।उपाय: सफेद पुष्प और सुगंधित धूप से आराधना करें। 9. धनु से मीन राशि – माँ सिद्धिदात्री माँ सिद्धिदात्री सभी सिद्धियों की दात्री हैं। इन राशियों के जातकों को आध्यात्मिक उन्नति, धन और सौभाग्य प्राप्त होता है।उपाय: ध्यान और जप करें — “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे”। ज्योतिषीय दृष्टि से महत्व नवरात्रि केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि ग्रहों की ऊर्जा को संतुलित करने का श्रेष्ठ काल है। प्रत्येक देवी एक ग्रह से संबंधित होती हैं — जैसे माँ शैलपुत्री मंगल से, माँ ब्रह्मचारिणी शुक्र से और माँ कालरात्रि शनि से जुड़ी हैं।इस अवधि में यदि सही मंत्र और उपाय किए जाएँ, तो जीवन के सभी क्षेत्रों में सकारात्मक परिणाम मिलते हैं। अंक ज्योतिष अनुसार नौ देवियाँ आपका जन्मांक भी बताता है कि किस देवी की कृपा से आपका भाग्य चमक सकता है: जन्मांक 1–3: माँ शैलपुत्री जन्मांक 4–5: माँ कात्यायनी जन्मांक 6–7: माँ महागौरी जन्मांक 8–9: माँ सिद्धिदात्री निष्कर्ष नवरात्रि का हर दिन एक नया अवसर लेकर आता है। राशि और अंक के अनुसार सही देवी की उपासना से जीवन में समृद्धि, शांति और सफलता के द्वार खुलते हैं। यदि आप जानना चाहते हैं कि आपकी कुंडली के अनुसार कौन-सी देवी की पूजा आपके लिए सबसे शुभ है, तोAcharya Sharad Swaroop Ji से संपर्क करें।संपर्क नंबर: +91-9818359075

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करवा चौथ 2025: चंद्रमा की ऊर्जा और वैवाहिक संबंधों पर उसका ज्योतिषीय प्रभाव

करवा चौथ 2025 और चंद्रमा की दिव्य ऊर्जा करवा चौथ का व्रत भारतीय दांपत्य जीवन का प्रतीक माना जाता है। इस दिन चंद्रमा की पूजा की जाती है क्योंकि चंद्र ऊर्जा का सीधा संबंध भावनाओं, प्रेम और मानसिक स्थिरता से होता है।ज्योतिष के अनुसार, चंद्रमा मन और भावना का स्वामी ग्रह है, इसलिए इस दिन इसका प्रभाव पति-पत्नी के संबंधों पर अत्यधिक पड़ता है। ज्योतिषीय दृष्टि से चंद्रमा का प्रभाव करवा चौथ की रात जब चंद्रमा पूर्ण रूप में दिखाई देता है, तब उसकी किरणें एक ऊर्जात्मक आवरण (energy field) बनाती हैं जो रिश्तों में सकारात्मकता और शांति लाती हैं। यदि किसी की कुंडली में चंद्रमा मजबूत है, तो उस व्यक्ति का विवाहिक जीवन मधुर रहता है। यदि चंद्रमा कमजोर हो, तो भावनात्मक असंतुलन, गलतफहमी और मानसिक तनाव उत्पन्न हो सकता है। इसलिए करवा चौथ का व्रत चंद्रमा की शक्ति को संतुलित करने का अवसर भी है। राशि अनुसार करवा चौथ पर उपाय मेष राशि: लाल वस्त्र पहनें और माता पार्वती को सिंदूर अर्पित करें। वृषभ राशि: सफेद चावल का दान करें और चंद्रमा को दूध चढ़ाएँ। मिथुन राशि: दंपति एक साथ चंद्रमा का दर्शन करें और “ॐ सोमाय नमः” मंत्र जपें। कर्क राशि: चंद्रमा की पूजा के समय मन की शुद्धता रखें और जल में शहद मिलाकर अर्घ्य दें। सिंह राशि: स्वर्ण या पीले रंग के वस्त्र पहनकर माता गौरी का ध्यान करें। कन्या राशि: तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाएँ और चंद्रमा को अर्घ्य दें। तुला राशि: दांपत्य सौहार्द बढ़ाने हेतु माता लक्ष्मी की पूजा करें। वृश्चिक राशि: लाल फूल और गुड़ का दान करें। धनु राशि: पूजा के समय विष्णु-सहस्त्रनाम का पाठ करें। मकर राशि: परिवार के साथ चंद्रमा का दर्शन करें और शांत भाव रखें। कुंभ राशि: चंद्रमा को जल देते समय “ॐ चन्द्राय नमः” मंत्र जपें। मीन राशि: सफेद पुष्प और खीर का भोग लगाएँ। चंद्रमा और दांपत्य प्रेम का संबंध चंद्रमा प्रेम, संवेदनशीलता और जुड़ाव का प्रतीक है।करवा चौथ के दिन जब पत्नी चंद्रमा के दर्शन के बाद व्रत खोलती है, तब यह प्रतीकात्मक रूप से भावनात्मक एकता और ऊर्जा के आदान-प्रदान को दर्शाता है।यह दिन पति-पत्नी के रिश्ते को और गहरा करता है तथा मानसिक संतुलन प्रदान करता है। ज्योतिषीय सलाह और उपाय करवा चौथ की रात चंद्रमा को दूध और जल से अर्घ्य दें। “ॐ सोम सोमाय नमः” मंत्र का 108 बार जप करें। यदि रिश्ते में तनाव हो, तो सफेद वस्त्र धारण करें और माता पार्वती से क्षमा याचना करें। चंद्रमा के दर्शन के बाद श्वेत पुष्प या चाँदी का दान करें। निष्कर्ष: करवा चौथ केवल एक पारंपरिक व्रत नहीं, बल्कि यह चंद्र ऊर्जा से संबंध जोड़ने का अवसर है।यह दिन हमें सिखाता है कि रिश्ते केवल कर्मकांड से नहीं, बल्कि ऊर्जा और भावना के संतुलन से मजबूत बनते हैं। व्यक्तिगत कुंडली एवं वैवाहिक जीवन से संबंधित उपायों के लिए Acharya Sharad Swaroop Ji से संपर्क कर सकते हैं।संपर्क नंबर: +91-9818359075  

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दीवाली 2025: शुभ मुहूर्त और प्रत्येक राशि के लिए ज्योतिषीय भविष्यफल

दीवाली 2025 का महत्व दीवाली, प्रकाश का पर्व, हर वर्ष कार्तिक अमावस्या के दिन मनाया जाता है। यह दिन माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का प्रतीक है।ज्योतिष के अनुसार, यह दिन सूर्य और चंद्रमा की संयुक्त ऊर्जा से अत्यंत शुभ माना जाता है। दीवाली 2025 में ग्रहों की स्थिति विशेष रूप से अनुकूल रहेगी, जिससे व्यापार, धन, और परिवार में उन्नति के संकेत मिल रहे हैं। दीवाली 2025 का शुभ मुहूर्त (Auspicious Muhurat) दीवाली तिथि: सोमवार, 20 अक्टूबर 2025 लक्ष्मी पूजा मुहूर्त: शाम 06:50 बजे से रात 08:42 बजे तक अमावस्या तिथि आरंभ: 20 अक्टूबर, सुबह 04:15 बजे अमावस्या तिथि समाप्त: 21 अक्टूबर, सुबह 02:48 बजे यह समय माँ लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए सर्वोत्तम माना गया है। राशिवार दीवाली 2025 भविष्यफल (Zodiac-Based Astrology Predictions) ♈ मेष राशि (Aries): धन वृद्धि और नए कार्यों का शुभारंभ संभव है। लाल रंग के दीप जलाना लाभदायक रहेगा। ♉ वृषभ राशि (Taurus): आर्थिक स्थिरता और घर में सुख-शांति बढ़ेगी। माँ लक्ष्मी को सफेद पुष्प अर्पित करें। ♊ मिथुन राशि (Gemini): व्यावसायिक लाभ और नए अवसर मिलेंगे। हरे रंग के वस्त्र पहनें और तुलसी पूजा करें। ♋ कर्क राशि (Cancer): भावनात्मक स्थिरता बढ़ेगी। चाँदी के दीपक से पूजा करें। ♌ सिंह राशि (Leo): कार्य में सफलता और प्रतिष्ठा की वृद्धि होगी। सूर्य देव को अर्घ्य दें। ♍ कन्या राशि (Virgo): व्यापार में लाभ और शुभ समाचार मिलेंगे। चंद्रमा को दूध से अर्घ्य दें। ♎ तुला राशि (Libra): लक्ष्मी कृपा से नए धन स्रोत बनेंगे। गुलाबी रंग का दीप जलाएँ। ♏ वृश्चिक राशि (Scorpio): रिश्तों में मिठास आएगी। लाल वस्त्र पहनकर माता लक्ष्मी की आराधना करें। ♐ धनु राशि (Sagittarius): नए निवेश और करियर ग्रोथ के संकेत हैं। भगवान विष्णु की आराधना करें। ♑ मकर राशि (Capricorn): सफलता और पारिवारिक सौहार्द बढ़ेगा। सफेद वस्त्र पहनें और पीतल का दीपक जलाएँ। ♒ कुंभ राशि (Aquarius): विदेश या नई नौकरी के अवसर बन सकते हैं। नीले रंग का दीपक जलाना शुभ रहेगा। ♓ मीन राशि (Pisces): भाग्य उन्नति और मानसिक शांति का समय। चाँदी का सिक्का माँ लक्ष्मी को चढ़ाएँ। दीवाली पर शुभ उपाय (Astrological Remedies for Prosperity) अपने घर की उत्तर दिशा में दीप जलाएँ। माँ लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्ति को एक साथ पूजें। शंख में जल भरकर घर में छिड़कें, इससे नकारात्मकता दूर होती है। पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाना अत्यंत शुभ होता है। \”ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः\” मंत्र का 108 बार जप करें। निष्कर्ष: दीवाली 2025 आपके जीवन में धन, सौभाग्य और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आ रही है।सही मुहूर्त और ज्योतिषीय उपायों का पालन करने से जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ेगी। व्यक्तिगत कुंडली एवं दीवाली विशेष उपायों के लिए Acharya Sharad Swaroop Ji से संपर्क कर सकते हैं।संपर्क नंबर: +91-9818359075

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माँ दुर्गा 2025: आगमन और प्रस्थान वाहन एवं उनका महत्व

माँ दुर्गा 2025 में आगमन और प्रस्थान का विशेष महत्व हर वर्ष नवरात्रि के समय माँ दुर्गा पृथ्वी लोक में अपने भक्तों के बीच आती हैं।लेकिन क्या आप जानते हैं कि माँ का आगमन और प्रस्थान किस वाहन पर होता है, इसका सीधा संबंध मानव जीवन और पृथ्वी के ऊर्जात्मक संतुलन से होता है? 2025 में माँ दुर्गा के आगमन वाहन और प्रस्थान वाहन के आधार पर शुभ-अशुभ परिणामों की भविष्यवाणी की जाती है। माँ दुर्गा का आगमन वाहन 2025 में क्या है? ज्योतिषीय गणना के अनुसार, जब माँ दुर्गा किसी विशेष वाहन पर आती हैं, तो वह वर्ष के लिए विशेष संकेत लेकर आती हैं — हाथी पर आगमन – वर्ष में समृद्धि, वर्षा और कृषि की उन्नति का संकेत। घोड़े पर आगमन – संघर्ष और युद्ध की संभावनाएँ बढ़ती हैं। नौका पर आगमन – प्राकृतिक आपदाओं से बचाव और संतुलन का वर्ष। डोली पर आगमन – सामाजिक सौहार्द और पारिवारिक सुख में वृद्धि। माँ दुर्गा का प्रस्थान वाहन 2025 में क्या रहेगा? हाथी पर प्रस्थान – सुखद और समृद्ध वर्ष का संकेत। नौका पर प्रस्थान – जल तत्व का संतुलन और व्यापार में लाभ। घोड़े पर प्रस्थान – तीव्र परिवर्तन और राजनीतिक अस्थिरता। डोली पर प्रस्थान – नए आरंभ और पारिवारिक एकता का वर्ष। ज्योतिषीय दृष्टि से वाहनों का महत्व माँ दुर्गा का वाहन सिर्फ प्रतीक नहीं बल्कि ऊर्जा का माध्यम है।प्रत्येक वाहन के साथ एक विशिष्ट ग्रह ऊर्जा जुड़ी होती है —जैसे घोड़ा मंगल ग्रह, हाथी बृहस्पति, नौका चंद्र, और डोली शुक्र से संबंधित मानी जाती है।इसलिए इनसे जुड़ी ऊर्जाएँ मानव जीवन और समाज में भी प्रभाव डालती हैं। माँ दुर्गा की कृपा प्राप्त करने के उपाय प्रतिदिन दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। माँ को लाल पुष्प और सिंदूर अर्पित करें। नवरात्रि में कुमारी पूजन अवश्य करें। ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को अन्न और वस्त्र का दान करें। निष्कर्ष: माँ दुर्गा 2025 का आगमन और प्रस्थान सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि यह ब्रह्मांडीय ऊर्जाओं का संकेत है।इस समय अपने कर्म, विचार और भक्ति पर ध्यान देना विशेष रूप से लाभदायक रहेगा। व्यक्तिगत कुंडली और नवरात्रि विशेष उपायों के लिए Acharya Sharad Swaroop Ji से संपर्क कर सकते हैं।संपर्क नंबर: +91-9818359075

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राशि आधारित करवा चौथ 2025 व्रत और पूजा उपाय

करवा चौथ 2025 का व्रत न केवल प्रेम और समर्पण का प्रतीक है, बल्कि ज्योतिष के अनुसार यह दिन ग्रहों के संतुलन और मानसिक शांति प्राप्त करने का श्रेष्ठ अवसर भी है।हर राशि का स्वामी ग्रह अलग होता है, और उसी के अनुसार पूजा और व्रत के नियमों का पालन करने से दांपत्य जीवन में सुख, समृद्धि और दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है। इस लेख में जानिए — आपकी राशि के अनुसार करवा चौथ 2025 व्रत के ज्योतिषीय उपाय और देवी-पूजन के विशेष सुझाव। करवा चौथ 2025 तिथि व मुहूर्त तारीख: शुक्रवार, 10 अक्टूबर 2025 पूजा मुहूर्त: शाम 5:57 PM से 7:11 PM तक चंद्रोदय समय: लगभग 8:13 PM(समय शहर अनुसार थोड़ा अलग हो सकता है — सटीक समय हेतु Times of India Karwa Chauth 2025 Article देखें) ♈ मेष राशि (Aries) स्वामी ग्रह: मंगल व्रत उपाय: लाल चूड़ी और सिंदूर का दान करें। देवी पूजन: माँ कात्यायनी की पूजा करें। लाभ: वैवाहिक जीवन में ऊर्जा और साहस बढ़ेगा। ♉ वृषभ राशि (Taurus) स्वामी ग्रह: शुक्र व्रत उपाय: गुलाबी वस्त्र धारण करें, सफेद मिठाई चढ़ाएं। देवी पूजन: माँ चंद्रघंटा लाभ: प्रेम संबंध मजबूत होंगे, वैवाहिक सामंजस्य बढ़ेगा। ♊ मिथुन राशि (Gemini) स्वामी ग्रह: बुध व्रत उपाय: हरी चूड़ी और पान अर्पित करें। देवी पूजन: माँ स्कंदमाता लाभ: संचार कौशल और दांपत्य समझ में वृद्धि होगी। ♋ कर्क राशि (Cancer) स्वामी ग्रह: चंद्र व्रत उपाय: चांदी का करवा या चंद्रमा को दूध से अर्घ्य दें। देवी पूजन: माँ शैलपुत्री लाभ: मानसिक शांति और भावनात्मक स्थिरता। ♌ सिंह राशि (Leo) स्वामी ग्रह: सूर्य व्रत उपाय: सुनहरी थाली से चंद्रमा को अर्घ्य दें। देवी पूजन: माँ कूष्मांडा लाभ: आत्मविश्वास, सफलता और स्वास्थ्य लाभ। ♍ कन्या राशि (Virgo) स्वामी ग्रह: बुध व्रत उपाय: तुलसी या हरित वस्त्र का उपयोग करें। देवी पूजन: माँ ब्रह्मचारिणी लाभ: मानसिक स्पष्टता और संयम की प्राप्ति। ♎ तुला राशि (Libra) स्वामी ग्रह: शुक्र व्रत उपाय: गुलाबी या सफेद वस्त्र पहनें। देवी पूजन: माँ महागौरी लाभ: सौंदर्य, आकर्षण और पारिवारिक सुख। ♏ वृश्चिक राशि (Scorpio) स्वामी ग्रह: मंगल व्रत उपाय: लाल फूल और गुड़ से चंद्रमा का पूजन करें। देवी पूजन: माँ कालरात्रि लाभ: भय और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति। ♐ धनु राशि (Sagittarius) स्वामी ग्रह: बृहस्पति व्रत उपाय: हल्दी या पीले कपड़े पहनें। देवी पूजन: माँ सिद्धिदात्री लाभ: आध्यात्मिक उन्नति और दांपत्य स्थिरता। ♑ मकर राशि (Capricorn) स्वामी ग्रह: शनि व्रत उपाय: तिल से दीपक जलाएं और नीले वस्त्र धारण करें। देवी पूजन: माँ कालरात्रि लाभ: कर्म-सुधार और मानसिक बल। ♒ कुंभ राशि (Aquarius) स्वामी ग्रह: शनि व्रत उपाय: चंद्रमा को शहद मिला दूध अर्पित करें। देवी पूजन: माँ महागौरी लाभ: स्थिरता, आर्थिक लाभ और सुख। ♓ मीन राशि (Pisces) स्वामी ग्रह: बृहस्पति व्रत उपाय: पीले वस्त्र और फूल अर्पित करें। देवी पूजन: माँ सिद्धिदात्री लाभ: भक्ति, शांति और वैवाहिक आनंद। करवा चौथ में राशि अनुसार पूजा का महत्व राशि के अनुसार व्रत और पूजन विधि का पालन करने से न केवल चंद्र बल बढ़ता है, बल्कि ग्रहों की स्थिति भी संतुलित होती है। यह उपाय पति-पत्नी के बीच विश्वास, प्रेम और मानसिक सामंजस्य को और गहरा करता है। ज्योतिषीय परामर्श लें यदि आप अपनी कुंडली के अनुसार करवा चौथ के विशेष उपाय, ग्रह शांति या व्रत विधि जानना चाहते हैं —आप Acharya Sharad Swaroop Ji से संपर्क कर सकते हैं।संपर्क नंबर: +91-9818359075 वे आपकी राशि और कुंडली देखकर बताएंगे कि कौन से उपाय आपके लिए सबसे अधिक शुभ रहेंगे।

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करवा चौथ 2025: शुभ मुहूर्त, ग्रह-प्रभाव और महत्व

भारतीय संस्कृति में करवा चौथ एक अत्यंत पवित्र व्रत है, जिसे पत्नियाँ अपने पतियों की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य की कामना से करती हैं। इस व्रत का महत्व केवल धार्मिक नहीं, बल्कि ज्योतिषीय दृष्टि से भी गहरा है। इस ब्लॉग में हम जानेंगे — करवा चौथ 2025 का शुभ मुहूर्त, ग्रहों की भूमिका, पूजन विधि और कुछ उपाय — साथ ही कैसे आप इस अवसर का अधिक लाभ उठा सकते हैं। करवा चौथ 2025: तारीख एवं व्रत समय करवा चौथ 2025, शुक्रवार, 10 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएगा। पुजा मुहूर्त: शाम लगभग 5:57 PM से 7:11 PM तक (देल्ही आदि स्थानों के लिये) व्रत अवधि (उपास समय): प्रातः 6:19 AM से 8:13 PM तक शुभ तिथि (चतुर्थी तिथि): यह तिथि 9 अक्टूबर की रात 10:54 PM से आरंभ होकर 10 अक्टूबर की शाम 7:38 PM तक रहेगी। चंद्र दृष्टि / चंद्रोदय (चंद्रमा निकलने का समय): लगभग 8:13 PM के करीब नोट: चंद्रमा निकलने का समय स्थान के अनुसार कुछ अंतर हो सकता है — इसलिए आपके नगर या क्षेत्र के पंचांग या ज्योतिष स्रोत देखें। करवा चौथ का ज्योतिषीय महत्व इस दिन चंद्र ग्रह की पूजा विशेष रूप से की जाती है, क्योंकि चंद्रमा हमारी मनोभावनाओं, मानसिक संतुलन और संवेदनशीलता का प्रतिनिधित्व करता है। करवा चौथ व्रत को चंद्र बल बढ़ाने वाला माना जाता है, जो कुंडली में चंद्र दोष या मानसिक अस्थिरता को शांत करने में सहायक हो सकता है। साथ ही ग्रह योग और विशेष तारकीय संरेखण इस दिन विवाहिक जीवन, प्रेम और पारिवारिक संबंधों को सुदृढ़ करने में सहायक माने जाते हैं। पूजा विधि और महत्वपूर्ण रीति-रिवाज़ सार्गी (Sargi): सूर्योदय से पहले सास (मां-इन-लॉ) द्वारा दी जाने वाली भोजन सामग्री और फलाहार। दिनभर निर्जल व्रत रखा जाता है — यानी न पानी, न भोजन। शाम को पुजा विधि: चंद्रमा की पूजा (अर्घ्य देना) करवा (मिट्टी का पात्र) सजाना श्री गणेश, देवी पार्वती आदि की उपासना कथा सुनना और व्रत कथा का पाठ करना व्रत खुलना: चंद्रमा देखकर या चंद्र प्रतिफल (जल में परावर्तित चंद्रमा) देख कर अर्घ्य देना और पति की छाया/परतेज्य हाथ से पानी पिलाना। सोलह श्रृंगार (Solah Shringar): इस दिन कपड़ा, आभूषण, मेहंदी, चूड़ी-नाखून सजावट आदि १६ श्रृंगार करना शुभ माना जाता है। ज्योतिषीय परामर्श के लिए संपर्क करें यदि आप अपनी कुंडली के अनुसार करवा चौथ पर विशेष उपाय, ग्रह दोष निवारण या व्रत विधि जानना चाहते हैं, तो अनुभवी Acharya Sharad Swaroop Ji से संपर्क करें।संपर्क नंबर: +91-9818359075 वे आपको व्यक्तिगत ज्योतिष अनुसार मार्गदर्शन देंगे जिससे यह व्रत आपके लिए अधिक शुभ और फलदायी बने। उपाय एवं सुझाव यदि व्रत चुक जाए (चंद्रमा न दिखे या अन्य कारण से) तो नीलगम, दूध, चंदन आदि से पूजा करके व्रत भांग किया जा सकता है, लेकिन यह स्थान विशेष ज्योतिष सलाह पर निर्भर करता है। व्रत के पहले दिन या बाद में चंद्र सूक्त मंत्र, चंद्र-स्तोत्र आदि का जाप करना लाभदायक माना जाता है। संहत ग्रहों की शांति के लिए देवी, चंद्रमा और राधा-कृष्ण की पूजा भी कर सकते हैं। यदि आपकी कुंडली में चंद्र दोष या मनो भावनात्मक अस्थिरता है, तो इस अवसर पर विशेष ज्योतिषीय उपायों के लिए सलाह लेना उचित रहेगा।

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इस नवरात्रि अपनी राशि के अनुसार किस देवी की करें पूजा

नवरात्रि वह पवित्र समय है जब माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर राशि के लिए एक विशेष देवी होती हैं, जिनकी पूजा करने से ग्रह दोष दूर होते हैं, सौभाग्य बढ़ता है और जीवन में शांति आती है?ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, प्रत्येक राशि का एक ग्रह स्वामी होता है और उसी के अनुसार देवी की आराधना से सर्वोत्तम फल मिलता है। अगर आप अपनी राशि के अनुसार सही देवी की उपासना करेंगे, तो इस नवरात्रि का प्रभाव कई गुना बढ़ जाएगा। आइए जानते हैं आपकी राशि के अनुसार कौन सी देवी की पूजा करनी चाहिए। मेष राशि (Aries) — माँ कात्यायनी मेष राशि के स्वामी मंगल हैं। माँ कात्यायनी मंगल ग्रह की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती हैं।लाभ: साहस, आत्मविश्वास और वैवाहिक जीवन में सफलता।मंत्र: “ॐ देवी कात्यायन्यै नमः।” वृषभ राशि (Taurus) — माँ चंद्रघंटा वृषभ राशि के स्वामी शुक्र ग्रह हैं। माँ चंद्रघंटा की पूजा से प्रेम, आकर्षण और वैवाहिक सुख प्राप्त होता है।लाभ: मन की शांति, रिश्तों में मधुरता।मंत्र: “ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः।” मिथुन राशि (Gemini) — माँ स्कंदमाता मिथुन राशि के स्वामी बुध हैं। माँ स्कंदमाता की आराधना से बुद्धि और संतान सुख मिलता है।लाभ: शिक्षा, ज्ञान और संतान से जुड़ी बाधाओं का निवारण।मंत्र: “ॐ देवी स्कंदमातायै नमः।” कर्क राशि (Cancer) — माँ शैलपुत्री कर्क राशि के स्वामी चंद्रमा हैं। माँ शैलपुत्री चंद्रमा से संबंधित देवी हैं।लाभ: मानसिक शांति, परिवारिक सुख और भावनात्मक स्थिरता।मंत्र: “ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः।” सिंह राशि (Leo) — माँ कूष्मांडा सिंह राशि के स्वामी सूर्य हैं। माँ कूष्मांडा की उपासना से ऊर्जा, आत्मविश्वास और स्वास्थ्य में सुधार होता है।लाभ: रोगों से मुक्ति, ऊर्जा और सफलता।मंत्र: “ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः।” कन्या राशि (Virgo) — माँ ब्रह्मचारिणी कन्या राशि के स्वामी बुध हैं। माँ ब्रह्मचारिणी की उपासना से तप, संयम और आत्मबल की प्राप्ति होती है।लाभ: आत्मसंयम, सफलता और मानसिक संतुलन।मंत्र: “ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः।” तुला राशि (Libra) — माँ महागौरी तुला राशि के स्वामी शुक्र हैं। माँ महागौरी सौंदर्य और सुख की देवी हैं।लाभ: विवाह, आकर्षण और जीवन में सामंजस्य।मंत्र: “ॐ देवी महागौर्यै नमः।” वृश्चिक राशि (Scorpio) — माँ कालरात्रि वृश्चिक राशि के स्वामी मंगल हैं। माँ कालरात्रि की पूजा से भय, नकारात्मकता और शत्रु नाश होता है।लाभ: भय से मुक्ति, आत्मबल और सुरक्षा।मंत्र: “ॐ देवी कालरात्र्यै नमः।” धनु राशि (Sagittarius) — माँ सिद्धिदात्री धनु राशि के स्वामी बृहस्पति हैं। माँ सिद्धिदात्री सिद्धियों की देवी हैं।लाभ: आध्यात्मिक उन्नति और सफलता।मंत्र: “ॐ देवी सिद्धिदात्यै नमः।” मकर राशि (Capricorn) — माँ कालरात्रि मकर राशि के स्वामी शनि हैं। माँ कालरात्रि की पूजा से शनि दोष का निवारण होता है।लाभ: कर्म सुधार, धन लाभ और स्थिरता।मंत्र: “ॐ देवी कालरात्र्यै नमः।” कुंभ राशि (Aquarius) — माँ महागौरी कुंभ राशि के स्वामी भी शनि हैं। माँ महागौरी की कृपा से जीवन में सुख और शांति आती है।लाभ: बाधाओं का निवारण, मानसिक संतुलन।मंत्र: “ॐ देवी महागौर्यै नमः।” मीन राशि (Pisces) — माँ सिद्धिदात्री मीन राशि के स्वामी बृहस्पति हैं। माँ सिद्धिदात्री की उपासना से आध्यात्मिक ज्ञान और सफलता प्राप्त होती है।लाभ: बुद्धि, भक्ति और ईश्वरीय कृपा।मंत्र: “ॐ देवी सिद्धिदात्यै नमः।” ज्योतिषीय सलाह: यदि आप अपनी कुंडली के अनुसार विशेष नवरात्रि पूजा, ग्रह शांति या देवी आराधना के उपाय जानना चाहते हैं, तो ज्योतिषीय परामर्श अवश्य लें। आप Acharya Sharad Swaroop Ji से संपर्क कर सकते हैं।संपर्क नंबर: +91-9818359075 वे आपकी राशि और कुंडली देखकर बताएंगे कि इस नवरात्रि कौन सी देवी की आराधना आपके लिए सबसे शुभ रहेगी। निष्कर्ष नवरात्रि का पर्व आत्मशुद्धि और देवी कृपा प्राप्त करने का अद्भुत समय है। यदि आप अपनी राशि के अनुसार देवी की पूजा करते हैं, तो ग्रह दोष दूर होते हैं और जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता प्राप्त होती है।

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