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ज्योतिष अनुसार जीवित्पुत्रिका व्रत में चंद्र और सूर्य की विशेष भूमिका क्यों है

जीवित्पुत्रिका व्रत का महत्व भारतीय परंपरा में जीवित्पुत्रिका व्रत माताओं द्वारा संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए रखा जाता है। इस व्रत में विशेष रूप से सूर्य और चंद्रमा की उपासना का विधान है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य और चंद्र ग्रह मानव जीवन और संतान के भविष्य पर गहरा प्रभाव डालते हैं। Why Moon & Sun Play an Important Role in Jivitputrika Vrat According to Astrology सूर्य (Sun): सूर्य आत्मा, जीवन ऊर्जा और आयु का प्रतीक है। यह पिता और वंश की परंपरा से जुड़ा ग्रह है। जीवित्पुत्रिका व्रत में सूर्य की उपासना से संतान को जीवन शक्ति और दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। चंद्र (Moon): चंद्र मन, भावनाएँ और मातृत्व का प्रतिनिधि है। यह माँ और संतान के बीच के गहरे संबंध को दर्शाता है। जीवित्पुत्रिका व्रत में चंद्रमा की पूजा करने से संतान को मानसिक स्थिरता, सुख और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। Why Moon & Sun Play an Important Role in Jivitputrika Vrat According to Astrology: आध्यात्मिक दृष्टि से सूर्य और चंद्रमा की ऊर्जा से मातृत्व और संतति संबंध मजबूत होते हैं। ज्योतिष में सूर्य-चंद्र को जीवन संतुलन का आधार माना जाता है। इस व्रत में दोनों की उपासना करने से कर्म शुद्धि और संतान रक्षण सुनिश्चित होता है। ज्योतिषीय परामर्श के लिए संपर्क करें यदि आप जानना चाहते हैं कि Why Moon & Sun Play an Important Role in Jivitputrika Vrat According to Astrology और यह व्रत आपकी कुंडली या संतान सुख पर कैसे प्रभाव डालेगा, तो आप सीधेAcharya Sharad Swaroop Ji से परामर्श ले सकते हैं। संपर्क नंबर: +91-9818359075 आचार्य जी आपकी जन्म कुंडली और ग्रह दशा के अनुसार विशेष उपाय और ज्योतिषीय मार्गदर्शन देंगे। जीवित्पुत्रिका व्रत और ज्योतिषीय लाभ संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि पारिवारिक शांति और सुख-समृद्धि नकारात्मक ग्रह दोषों का शमन माता और संतान के बीच आत्मिक बंधन की मजबूती अधिक जानकारी के लिए आप हमारी वेबसाइट पर ज्योतिष सेवाएँ देखें। और पढ़ें जीवित्पुत्रिका व्रत और इसकी परंपराओं के बारे में अधिक जानकारी हेतु यहाँ पढ़ें: Jivitputrika Vrat Significance  निष्कर्ष Why Moon & Sun Play an Important Role in Jivitputrika Vrat According to Astrology यह प्रश्न केवल धार्मिक दृष्टि से नहीं, बल्कि ज्योतिषीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। सूर्य और चंद्रमा की उपासना से संतान सुख, दीर्घायु और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।

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Pitru Paksha 2025: पितरों को समर्पित अनुष्ठान और कर्म शुद्धि का ज्योतिषीय महत्व

Pitru Paksha 2025 का ज्योतिषीय महत्व Pitru Paksha 2025 पितरों को स्मरण और सम्मान देने का पवित्र समय है। इस अवधि में किए गए श्राद्ध, तर्पण और दान-पुण्य से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है।ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पितृ पक्ष के दौरान हमारे पूर्वज हमें आशीर्वाद देने के लिए पृथ्वी लोक के करीब आते हैं। Pitru Paksha 2025: पितरों की आत्मा की शांति हेतु कर्म श्राद्ध एवं तर्पण करना ब्राह्मण एवं जरूरतमंदों को भोजन कराना अन्न, वस्त्र एवं दान देना घर में गंगा जल का छिड़काव करना ध्यान एवं मंत्र जप करना पितृ दोष और कर्म शुद्धि यदि किसी की कुंडली में पितृ दोष है तो उसका जीवन बाधाओं, मानसिक अशांति और आर्थिक परेशानियों से प्रभावित हो सकता है। पितृ पक्ष में किए गए उचित उपाय और श्राद्ध अनुष्ठान से कर्म शुद्धि होती है और पितरों की कृपा प्राप्त होती है। ज्योतिषीय परामर्श के लिए संपर्क करें यदि आप जानना चाहते हैं कि Pitru Paksha 2025 आपकी कुंडली और जीवन पर कैसे असर डालेगा, तो आप सीधेAcharya Sharad Swaroop Ji से मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं। संपर्क नंबर: +91-9818359075 आचार्य जी आपकी जन्म कुंडली देखकर पितृ दोष निवारण और श्राद्ध अनुष्ठान से जुड़े उपाय बताएंगे। Pitru Paksha 2025: अनुष्ठान और आध्यात्मिक लाभ परिवार में सुख-शांति का आशीर्वाद पूर्वजों की आत्मा की तृप्ति अड़चनों और बाधाओं से मुक्ति पितृ दोष का शमन आत्मिक शुद्धि और कर्म संतुलन अधिक जानकारी के लिए आप हमारी वेबसाइट पर ज्योतिष सेवाएँ देखें bhavishyanakshatra.com। और पढ़ें पितृ पक्ष और श्राद्ध की परंपरा पर गहन जानकारी के लिए पढ़ें: Hindu Rituals for Ancestors निष्कर्ष Pitru Paksha 2025 केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि पूर्वजों से जुड़ने और कर्म शुद्धि का एक आध्यात्मिक अवसर है। सही अनुष्ठान और ज्योतिषीय उपाय अपनाकर आप पितरों की कृपा और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन प्राप्त कर सकते हैं।

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Chandra Grahan 2025: सूतक, राशिवार उपाय और चंद्र ग्रहण के ज्योतिषीय रहस्य

Chandra Grahan 2025 का महत्व चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan 2025) केवल खगोलशास्त्रीय घटना नहीं है बल्कि इसका गहरा आध्यात्मिक और ज्योतिषीय महत्व है। 2025 का चंद्र ग्रहण हर राशि के लिए अलग-अलग प्रभाव लेकर आएगा।भारतीय ज्योतिष में ग्रहण को आत्मिक शुद्धि, तपस्या और साधना का समय माना गया है। सूतक काल में क्या करें और क्या न करें? ग्रहण से लगभग 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है। इस दौरान: भोजन, पूजा और शुभ कार्य वर्जित होते हैं। ध्यान, जप और मंत्रोच्चारण करने से पुण्य फल मिलता है। गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी रखनी चाहिए। ग्रहण के समय स्नान और दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। Chandra Grahan 2025: राशिवार उपाय मेष राशि – हनुमान चालीसा का पाठ करें। वृषभ राशि – देवी महालक्ष्मी की आराधना करें। मिथुन राशि – विष्णु सहस्रनाम का जप करें। कर्क राशि – शिवलिंग पर जल चढ़ाएँ। सिंह राशि – सूर्य मंत्र का जप करें। कन्या राशि – दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। तुला राशि – शनि देव की उपासना करें। वृश्चिक राशि – महामृत्युंजय मंत्र का जप करें। धनु राशि – गीता का पाठ करें। मकर राशि – पीपल वृक्ष की पूजा करें। कुंभ राशि – रुद्राभिषेक करें। मीन राशि – विष्णु जी के नाम का स्मरण करें। ज्योतिषीय परामर्श के लिए संपर्क करें यदि आप जानना चाहते हैं कि Chandra Grahan 2025 आपकी कुंडली, ग्रह दशा और जीवन को कैसे प्रभावित करेगा, तो आप सीधेAcharya Sharad Swaroop Ji से परामर्श ले सकते हैं। संपर्क नंबर: +91-9818359075 आचार्य जी आपकी जन्म कुंडली और ग्रह योग के आधार पर विस्तृत भविष्यवाणी और समाधान बताएंगे। Chandra Grahan 2025 और जीवन में परिवर्तन यह ग्रहण आत्मनिरीक्षण और मानसिक संतुलन के लिए महत्वपूर्ण है। जो साधना, ध्यान और ज्योतिषीय उपाय इस दिन किए जाते हैं, वे व्यक्ति को नकारात्मक ऊर्जा से मुक्त कर सकारात्मक जीवन परिवर्तन की ओर ले जाते हैं।आप अधिक जानकारी और ज्योतिष सेवाओं के लिए हमारी वेबसाइट पर सेवाएँ देखें bhavishyanakshatra.com। और पढ़ें चंद्र ग्रहण के वैज्ञानिक पहलुओं पर अधिक जानकारी के लिए यहाँ पढ़ें: NASA Lunar Eclipse Information निष्कर्ष Chandra Grahan 2025 केवल एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नति और कर्म शुद्धि का अवसर है। राशिवार उपाय और ज्योतिषीय मार्गदर्शन से आप इस दिन का सर्वोत्तम लाभ उठा सकते हैं।

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करवाचौथ 2025: शुभ मुहूर्त, चंद्रोदय समय और ज्योतिषीय महत्व

करवाचौथ हिंदू परंपरा का एक प्रमुख व्रत है, जिसे विवाहित महिलाएँ अपने पति की दीर्घायु और मंगलमय जीवन के लिए रखती हैं। इस दिन पूरे दिन निर्जला व्रत रखकर रात को चंद्रोदय के समय पति के हाथों जल ग्रहण किया जाता है। करवाचौथ 2025 और भी खास होगा क्योंकि इस बार ग्रह–नक्षत्रों की स्थिति व्रत को अत्यंत फलदायी बना रही है। करवाचौथ 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त तिथि आरंभ: 14 अक्टूबर 2025, मंगलवार तिथि समाप्त: 15 अक्टूबर 2025, बुधवार पूजन मुहूर्त: शाम 5:45 बजे से 7:00 बजे तक चंद्रोदय समय: रात 8:17 बजे (दिल्ली का समय – स्थान अनुसार बदलाव संभव) इस समय पूजा और अर्घ्य देना सर्वोत्तम माना गया है। Karwa Chauth 2025: Shubh Muhurat, Moonrise Time & Astrological Significance ज्योतिषीय महत्व करवाचौथ पर चंद्रमा को अर्घ्य देने से दांपत्य जीवन में प्रेम और मधुरता बनी रहती है। इस दिन चंद्रमा और करवा माता की पूजा करने से परिवार में सुख–शांति आती है। जिनकी कुंडली में चंद्र दोष है, उनके लिए यह व्रत अत्यंत शुभ माना जाता है। यह व्रत शुक्र और चंद्रमा को बल प्रदान करता है, जिससे दांपत्य जीवन सुखद बनता है। Contact Acharya Sharad Swaroop Ji यदि आप जानना चाहते हैं कि Karwa Chauth 2025: Shubh Muhurat, Moonrise Time & Astrological Significance आपकी व्यक्तिगत कुंडली पर क्या असर डालेगा और आपके लिए कौन से उपाय लाभकारी होंगे, तो अभी संपर्क करें। कॉल करें: +91-9818359075आचार्य शरद स्वरूप जी आपकी जन्म कुंडली का गहन विश्लेषण करके बताएंगे कि करवाचौथ आपके जीवन और रिश्तों में कौन से सकारात्मक बदलाव ला सकता है। करवाचौथ व्रत के उपाय व्रत के दिन लाल या पीले वस्त्र धारण करें। चंद्रमा को दूध और जल से अर्घ्य दें। गणेश जी और करवा माता की पूजा अवश्य करें। व्रत कथा का श्रवण करें। और अधिक जानकारी के लिए करवाचौथ व्रत कथा और महत्व  हमारी ज्योतिषीय सेवाएँ देखें  निष्कर्ष Karwa Chauth 2025: Shubh Muhurat, Moonrise Time & Astrological Significance केवल एक धार्मिक व्रत ही नहीं बल्कि ज्योतिषीय दृष्टि से भी अत्यंत शुभ है। यह न केवल पति–पत्नी के रिश्तों को मजबूत बनाता है बल्कि परिवार में सुख–समृद्धि भी लाता है। सही ज्योतिषीय परामर्श और अपनी कुंडली का विस्तृत विश्लेषण कराने के लिए अभी आचार्य शरद स्वरूप जी (+91-9818359075) से संपर्क करें।

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गणेश विसर्जन क्यों किया जाता है और इसका ज्योतिषीय महत्व

गणेशोत्सव का समापन गणेश विसर्जन से होता है। यह केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि गहरे ज्योतिषीय और आध्यात्मिक अर्थ भी रखती है। गणेश जी को \”विघ्नहर्ता\” माना जाता है और उन्हें हर शुभ कार्य का प्रथम देवता माना गया है। जब हम गणपति की मूर्ति को घर या पंडाल में स्थापित करते हैं, तो यह हमारे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और नए आरंभ का प्रतीक होती है। विसर्जन के समय हम यह मान्यता रखते हैं कि भगवान गणेश अपनी शक्ति को पुनः ब्रह्मांड में विलीन कर देते हैं और हमें अगले वर्ष और अधिक शक्ति प्रदान करते हैं। गणेश विसर्जन का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व अनित्य का संदेश – विसर्जन हमें सिखाता है कि जीवन में कुछ भी स्थायी नहीं है। ऊर्जा का प्रवाह – मूर्ति का जल में विसर्जन सकारात्मक ऊर्जा को पुनः प्रकृति में मिलाता है। नवीन शुरुआत – यह अगले वर्ष एक नए चक्र और नए आरंभ का प्रतीक है। ज्योतिषीय दृष्टि से – गणेश विसर्जन के समय सूर्य और चंद्र की स्थिति विशेष प्रभाव डालती है। यह समय व्यक्ति की कुंडली में मानसिक शांति और विघ्नों से मुक्ति का संकेत देता है। Contact Acharya Sharad Swaroop Ji यदि आप जानना चाहते हैं कि Why We Perform Ganesh Visarjan and Its Astrological Meaning आपकी व्यक्तिगत कुंडली पर किस प्रकार असर डाल सकता है, तो तुरंत संपर्क करें। कॉल करें: +91-9818359075आचार्य शरद स्वरूप जी आपको बताएंगे कि आपकी राशि और ग्रह स्थिति के अनुसार कौन से उपाय करने चाहिए। Why We Perform Ganesh Visarjan and Its Astrological Meaning: त्योहार और ज्योतिष त्योहारों के समय यह परंपरा न केवल धार्मिक महत्व रखती है बल्कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भी बेहद खास होती है। कुंडली में विघ्न दोष हो तो गणेश पूजन और विसर्जन अत्यंत शुभ माना जाता है। यह समय व्यक्ति के करियर, स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन को सकारात्मक दिशा में ले जा सकता है। यदि किसी जातक की कुंडली में चंद्र–ग्रहण दोष या राहु–केतु की बाधा हो तो गणेश विसर्जन के अवसर पर विशेष पूजा लाभकारी होती है। और अधिक जानकारी के लिए गणेश पूजा और ज्योतिषीय महत्व  हमारी धार्मिक एवं ज्योतिष सेवाएँ देखें  निष्कर्ष Why We Perform Ganesh Visarjan and Its Astrological Meaning केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि गहरा जीवन दर्शन और ज्योतिषीय रहस्य छुपाए हुए है। यह हमें जीवन में अस्थायीता, सकारात्मक ऊर्जा और नवसृजन का संदेश देता है। सटीक ज्योतिषीय परामर्श और अपनी कुंडली का गहन विश्लेषण कराने के लिए अभी आचार्य शरद स्वरूप जी (+91-9818359075) से संपर्क करें।

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Ganesh Chaturthi 2025: Shubh Muhurat and Puja Timings Based on Your Rashi

गणेश चतुर्थी 2025 पूरे भारत में धूमधाम से मनाई जाएगी। इस दिन विघ्नहर्ता गणेश जी की पूजा–अर्चना विशेष फलदायी मानी जाती है। सही समय पर की गई पूजा न केवल मनोकामनाएँ पूर्ण करती है बल्कि जीवन से विघ्न–बाधाओं को भी दूर करती है। गणेश चतुर्थी 2025 का शुभ मुहूर्त तिथि आरंभ: 26 अगस्त 2025, मंगलवार तिथि समाप्त: 27 अगस्त 2025, बुधवार विनायक पूजन का शुभ मुहूर्त: सुबह 11:25 बजे से दोपहर 01:45 बजे तक अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:05 बजे से 12:55 बजे तक इस समय पर गणेश जी की मूर्ति स्थापना और पूजा करना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। राशियों के अनुसार पूजा समय मेष (Aries): प्रातः 7:30 – 9:00 बजेवृषभ (Taurus): सुबह 9:00 – 10:30 बजेमिथुन (Gemini): दोपहर 12:00 – 1:00 बजेकर्क (Cancer): सुबह 8:00 – 9:30 बजेसिंह (Leo): दोपहर 1:00 – 2:00 बजेकन्या (Virgo): शाम 4:00 – 5:30 बजेतुला (Libra): दोपहर 3:00 – 4:30 बजेवृश्चिक (Scorpio): सुबह 6:00 – 7:00 बजेधनु (Sagittarius): शाम 5:30 – 7:00 बजेमकर (Capricorn): सुबह 10:00 – 11:30 बजेकुंभ (Aquarius): शाम 7:00 – 8:30 बजेमीन (Pisces): रात 8:30 – 9:30 बजे Contact Acharya Sharad Swaroop Ji यदि आप जानना चाहते हैं कि Ganesh Chaturthi 2025: Shubh Muhurat and Puja Timings Based on Your Rashi आपकी कुंडली पर किस प्रकार असर डालेगा या कौन सा समय आपके लिए सबसे शुभ है, तो अभी संपर्क करें। कॉल करें: +91-9818359075आचार्य शरद स्वरूप जी से बात करके आप अपनी राशि और ग्रह स्थिति के अनुसार पूजा का उत्तम समय और उपाय जान सकते हैं। और अधिक जानकारी के लिए गणेश चतुर्थी पूजा विधि और महत्व हमारी ज्योतिषीय सेवाएँ देखें निष्कर्ष Ganesh Chaturthi 2025: Shubh Muhurat and Puja Timings Based on Your Rashi के अनुसार यदि आप अपने राशि–अनुकूल समय पर गणेश जी की पूजा करते हैं तो इसका फल कई गुना बढ़ जाता है। इस वर्ष गणेशोत्सव का पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है बल्कि ज्योतिषीय दृष्टि से भी अत्यंत विशेष है। अपनी कुंडली का गहन विश्लेषण और सटीक पूजा का समय जानने के लिए अभी आचार्य शरद स्वरूप जी (+91-9818359075) से संपर्क करें।

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Why Ganesh Chaturthi Is Considered the Most Auspicious Day for New Beginnings

गणेश चतुर्थी को पूरे भारत में उत्साह और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इस दिन को नए आरंभ और नई शुरुआत के लिए सबसे शुभ माना जाता है।भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और सिद्धि–बुद्धि के दाता कहा गया है। किसी भी शुभ कार्य, व्यापार, विवाह, या नए जीवन अध्याय की शुरुआत से पहले गणेश जी की पूजा करना परंपरा रही है। क्यों है गणेश चतुर्थी नए आरंभ के लिए सबसे शुभ दिन? विघ्नों का नाश – गणेश जी की कृपा से जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं। सिद्धि और सफलता – इस दिन किए गए नए कार्य में शीघ्र सफलता मिलने की संभावना बढ़ती है। ज्योतिषीय महत्व – गणेश चतुर्थी के समय ग्रहों की विशेष स्थिति व्यक्ति की कुंडली में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। धन और समृद्धि का आशीर्वाद – गणेश जी को धन–संपत्ति और समृद्धि का कारक भी माना जाता है। Contact Acharya Sharad Swaroop Ji यदि आप जानना चाहते हैं कि Why Ganesh Chaturthi Is Considered the Most Auspicious Day for New Beginnings आपकी व्यक्तिगत कुंडली को कैसे प्रभावित करेगा, तो तुरंत संपर्क करें। कॉल करें: +91-9818359075आचार्य शरद स्वरूप जी आपको बताएंगे कि आपके नए कार्य, व्यवसाय, या जीवन की शुरुआत का सर्वोत्तम समय कौन सा है। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से गणेश चतुर्थी गणेश चतुर्थी पर पूजा करने से राहु–केतु दोष, ग्रहण दोष, और पितृ दोष जैसे कई नकारात्मक प्रभाव भी कम हो जाते हैं।यह दिन उन लोगों के लिए खास होता है जो: नया व्यापार शुरू करना चाहते हैं। शिक्षा, करियर या नौकरी में बदलाव की सोच रहे हैं। विवाह या गृह प्रवेश की योजना बना रहे हैं। और अधिक जानकारी के लिए गणेश चतुर्थी का ज्योतिषीय महत्व  हमारी ज्योतिषीय सेवाएँ देखें निष्कर्ष Why Ganesh Chaturthi Is Considered the Most Auspicious Day for New Beginnings का रहस्य यह है कि यह दिन केवल धार्मिक नहीं बल्कि ज्योतिषीय दृष्टि से भी अत्यंत पावन है। भगवान गणेश की कृपा से इस दिन शुरू किया गया हर नया कार्य सफलता की ओर बढ़ता है। अपनी कुंडली का गहन विश्लेषण और नए आरंभ के लिए सबसे शुभ समय जानने हेतु अभी आचार्य शरद स्वरूप जी (+91-9818359075) से संपर्क करें।

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क्यों चढ़ाया जाता है मोदक गणेश जी को?

गणेश चतुर्थी और गणेश पूजा के अवसर पर सबसे पहले मोदक का भोग लगाया जाता है। इसे गणेश जी का प्रिय भोजन माना गया है।मोदक केवल एक मिठाई नहीं, बल्कि ज्ञान, समृद्धि और संतुष्टि का प्रतीक है। पौराणिक कारण: क्यों मोदक है गणेश जी का प्रिय? पौराणिक कथा – एक बार देवी–देवताओं ने माता पार्वती को दिव्य मोदक प्रदान किया। पार्वती जी ने यह मोदक अपने पुत्र गणेश और कार्तिकेय में से सबसे योग्य को देने का निर्णय किया। गणेश जी ने पूरे ब्रह्मांड की परिक्रमा करने के बजाय अपने माता–पिता की परिक्रमा की और मोदक प्राप्त किया। तभी से मोदक गणेश जी का सबसे प्रिय प्रसाद माना जाता है। ज्ञान और बुद्धि का प्रतीक – मोदक का मीठा स्वाद ज्ञान और आध्यात्मिक संतुष्टि का प्रतीक है। समृद्धि का प्रतीक – मोदक का गोल आकार पूर्णता और समृद्धि को दर्शाता है। Contact Acharya Sharad Swaroop Ji यदि आप जानना चाहते हैं कि Why Modak Is Offered to Lord Ganesha: Mythological & Spiritual Meaning आपकी कुंडली और जीवन पर किस प्रकार प्रभाव डालता है, तो तुरंत संपर्क करें। कॉल करें: +91-9818359075आचार्य शरद स्वरूप जी आपको बताएंगे कि गणेश पूजा और विशेष भोग आपकी व्यक्तिगत ग्रह–स्थिति पर कैसे शुभ प्रभाव डाल सकता है। मोदक का आध्यात्मिक महत्व शांति और संतोष – मोदक भोग लगाने से मन को शांति और आत्मिक संतोष प्राप्त होता है। सकारात्मक ऊर्जा – पूजा के समय मोदक चढ़ाने से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। मनोकामना पूर्ति – भक्त की हर मनोकामना शीघ्र पूरी होती है। और अधिक जानकारी के लिए गणेश पूजा और प्रसाद का महत्व  हमारी ज्योतिषीय सेवाएँ देखें निष्कर्ष Why Modak Is Offered to Lord Ganesha: Mythological & Spiritual Meaning केवल धार्मिक मान्यता नहीं बल्कि गहरा आध्यात्मिक संदेश देता है। मोदक गणेश जी की कृपा प्राप्त करने और जीवन में संतोष, ज्ञान और समृद्धि लाने का प्रतीक है। अपनी कुंडली का गहन विश्लेषण और गणेश भक्ति का विशेष महत्व जानने हेतु अभी आचार्य शरद स्वरूप जी (+91-9818359075) से संपर्क करें।

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गणेश चतुर्थी पर चंद्र दर्शन क्यों निषेध है, इसके पीछे की पौराणिक कथा और ज्योतिषीय कारण।

गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ की जाती है। लेकिन इस दिन चंद्र दर्शन (Moon sighting) को वर्जित माना गया है।पौराणिक कथाओं और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से माना जाता है कि गणेश चतुर्थी पर चंद्रमा देखने से मिथ्या दोष लगता है, जिससे व्यक्ति पर झूठा आरोप लग सकता है। पौराणिक कथा: चंद्र दर्शन वर्जित क्यों? पौराणिक कथा के अनुसार एक बार गणेश जी अपने वाहन मूषक पर सवार होकर लौट रहे थे। तभी चंद्रमा ने उनका उपहास किया। क्रोधित होकर गणेश जी ने चंद्रमा को शाप दिया कि जो भी गणेश चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन करेगा, उस पर झूठा आरोप लगेगा।बाद में देवताओं और ऋषियों के अनुरोध पर गणेश जी ने शाप को शिथिल किया और कहा कि जो भक्त इस दिन सिंहासन कथा या गणेश चतुर्थी व्रत कथा का पाठ करेगा, वह इस दोष से मुक्त हो जाएगा। Contact Acharya Sharad Swaroop Ji यदि आप जानना चाहते हैं कि Ganesh Chaturthi 2025: Why You Should Not Sight the Moon आपकी व्यक्तिगत कुंडली और जीवन पर क्या असर डाल सकता है, तो तुरंत संपर्क करें। कॉल करें: +91-9818359075आचार्य शरद स्वरूप जी आपकी जन्म कुंडली देखकर बताएंगे कि मिथ्या दोष या चंद्रमा से संबंधित ग्रहदोष को कैसे दूर किया जा सकता है। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से चंद्र दर्शन चंद्रमा मन और भावनाओं का कारक है। इस दिन चंद्र दर्शन करने से मानसिक अस्थिरता और झूठे आरोप लगने का खतरा बढ़ता है। यदि आपकी कुंडली में चंद्रमा से संबंधित दोष (जैसे चंद्र–राहु या चंद्र–केतु का मेल) है तो यह और अधिक प्रभाव डाल सकता है। इसलिए इस दिन विशेष सावधानी बरतनी चाहिए और कथा सुनकर ही व्रत का समापन करना चाहिए। और अधिक जानकारी के लिए गणेश चतुर्थी कथा और महत्व  हमारी ज्योतिषीय सेवाएँ देखें  निष्कर्ष Ganesh Chaturthi 2025: Why You Should Not Sight the Moon का रहस्य यह है कि यह केवल धार्मिक परंपरा ही नहीं बल्कि ज्योतिषीय दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस दिन चंद्र दर्शन से बचना चाहिए ताकि जीवन में अनावश्यक आरोप और बाधाएँ न आएं। सही मार्गदर्शन और अपनी कुंडली का सटीक विश्लेषण पाने के लिए अभी आचार्य शरद स्वरूप जी (+91-9818359075) से संपर्क करें।

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अंक ज्योतिष और पूर्णिमा: गुरु पूर्णिमा पर आपका जन्मांक क्या कहता है?

गुरु पूर्णिमा का दिन ज्ञान, साधना और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर होता है। यह पूर्णिमा विशेष रूप से गुरु, आचार्य और मार्गदर्शकों को समर्पित है।अंक ज्योतिष (Numerology) के अनुसार, इस दिन चंद्रमा की ऊर्जा जन्मांक के आधार पर अलग-अलग प्रभाव डालती है। इसलिए हर व्यक्ति के लिए गुरु पूर्णिमा के अवसर पर विशेष संदेश छुपा होता है। जन्मांक के अनुसार गुरु पूर्णिमा का प्रभाव जन्मांक 1 – आत्मविश्वास बढ़ेगा, नए कार्य शुरू करने का अवसर मिलेगा।जन्मांक 2 – भावनाओं पर नियंत्रण रखें, गुरु का आशीर्वाद सफलता दिलाएगा।जन्मांक 3 – ज्ञान प्राप्ति और शिक्षा से जुड़े कार्यों में प्रगति होगी।जन्मांक 4 – अनुशासन और परिश्रम से नए अवसर प्राप्त होंगे।जन्मांक 5 – यात्रा और नए संबंध लाभकारी रहेंगे।जन्मांक 6 – परिवार और प्रेम जीवन में सुखद परिणाम मिलेंगे।जन्मांक 7 – आध्यात्मिक उन्नति और ध्यान से शांति मिलेगी।जन्मांक 8 – करियर और वित्तीय मामलों में सकारात्मक बदलाव होंगे।जन्मांक 9 – सेवा कार्य और परोपकार से शुभ फल प्राप्त होंगे। Contact Acharya Sharad Swaroop Ji यदि आप जानना चाहते हैं कि Numerology of Full Moons: What Your Birth Number Says on Guru Purnima आपके जीवन और कुंडली को कैसे प्रभावित करेगा, तो तुरंत संपर्क करें। कॉल करें: +91-9818359075आचार्य शरद स्वरूप जी आपकी जन्म कुंडली और अंक ज्योतिष का विश्लेषण करके बताएंगे कि गुरु पूर्णिमा आपके लिए कौन से अवसर और चुनौतियाँ लेकर आई है। गुरु पूर्णिमा और आध्यात्मिक महत्व गुरु पूर्णिमा पर गुरु, शिक्षक और आचार्यों की पूजा करने से जीवन में ज्ञान और सफलता की वृद्धि होती है। इस दिन ध्यान, साधना और जप से मानसिक शांति प्राप्त होती है। अंक ज्योतिष के अनुसार यह दिन जन्मांक और चंद्रमा की स्थिति के आधार पर जीवन में विशेष परिणाम देता है। और अधिक जानकारी के लिए अंक ज्योतिष और पूर्णिमा का महत्व  हमारी ज्योतिषीय सेवाएँ देखें  निष्कर्ष Numerology of Full Moons: What Your Birth Number Says on Guru Purnima हमें यह समझाता है कि हर पूर्णिमा, विशेषकर गुरु पूर्णिमा, जन्मांक के अनुसार जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का अवसर देती है।इस दिन गुरु और आचार्य की कृपा के साथ-साथ अंक ज्योतिष का गहरा प्रभाव भी महसूस किया जा सकता है। अपनी कुंडली और जन्मांक का सटीक विश्लेषण जानने के लिए अभी आचार्य शरद स्वरूप जी (+91-9818359075) से संपर्क करें।

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