करवा चौथ 2025 और चंद्रमा की दिव्य ऊर्जा
करवा चौथ का व्रत भारतीय दांपत्य जीवन का प्रतीक माना जाता है। इस दिन चंद्रमा की पूजा की जाती है क्योंकि चंद्र ऊर्जा का सीधा संबंध भावनाओं, प्रेम और मानसिक स्थिरता से होता है।
ज्योतिष के अनुसार, चंद्रमा मन और भावना का स्वामी ग्रह है, इसलिए इस दिन इसका प्रभाव पति-पत्नी के संबंधों पर अत्यधिक पड़ता है।
ज्योतिषीय दृष्टि से चंद्रमा का प्रभाव
करवा चौथ की रात जब चंद्रमा पूर्ण रूप में दिखाई देता है, तब उसकी किरणें एक ऊर्जात्मक आवरण (energy field) बनाती हैं जो रिश्तों में सकारात्मकता और शांति लाती हैं।
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यदि किसी की कुंडली में चंद्रमा मजबूत है, तो उस व्यक्ति का विवाहिक जीवन मधुर रहता है।
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यदि चंद्रमा कमजोर हो, तो भावनात्मक असंतुलन, गलतफहमी और मानसिक तनाव उत्पन्न हो सकता है।
इसलिए करवा चौथ का व्रत चंद्रमा की शक्ति को संतुलित करने का अवसर भी है।
राशि अनुसार करवा चौथ पर उपाय
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मेष राशि: लाल वस्त्र पहनें और माता पार्वती को सिंदूर अर्पित करें।
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वृषभ राशि: सफेद चावल का दान करें और चंद्रमा को दूध चढ़ाएँ।
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मिथुन राशि: दंपति एक साथ चंद्रमा का दर्शन करें और “ॐ सोमाय नमः” मंत्र जपें।
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कर्क राशि: चंद्रमा की पूजा के समय मन की शुद्धता रखें और जल में शहद मिलाकर अर्घ्य दें।
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सिंह राशि: स्वर्ण या पीले रंग के वस्त्र पहनकर माता गौरी का ध्यान करें।
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कन्या राशि: तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाएँ और चंद्रमा को अर्घ्य दें।
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तुला राशि: दांपत्य सौहार्द बढ़ाने हेतु माता लक्ष्मी की पूजा करें।
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वृश्चिक राशि: लाल फूल और गुड़ का दान करें।
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धनु राशि: पूजा के समय विष्णु-सहस्त्रनाम का पाठ करें।
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मकर राशि: परिवार के साथ चंद्रमा का दर्शन करें और शांत भाव रखें।
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कुंभ राशि: चंद्रमा को जल देते समय “ॐ चन्द्राय नमः” मंत्र जपें।
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मीन राशि: सफेद पुष्प और खीर का भोग लगाएँ।
चंद्रमा और दांपत्य प्रेम का संबंध
चंद्रमा प्रेम, संवेदनशीलता और जुड़ाव का प्रतीक है।
करवा चौथ के दिन जब पत्नी चंद्रमा के दर्शन के बाद व्रत खोलती है, तब यह प्रतीकात्मक रूप से भावनात्मक एकता और ऊर्जा के आदान-प्रदान को दर्शाता है।
यह दिन पति-पत्नी के रिश्ते को और गहरा करता है तथा मानसिक संतुलन प्रदान करता है।
ज्योतिषीय सलाह और उपाय
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करवा चौथ की रात चंद्रमा को दूध और जल से अर्घ्य दें।
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“ॐ सोम सोमाय नमः” मंत्र का 108 बार जप करें।
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यदि रिश्ते में तनाव हो, तो सफेद वस्त्र धारण करें और माता पार्वती से क्षमा याचना करें।
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चंद्रमा के दर्शन के बाद श्वेत पुष्प या चाँदी का दान करें।
निष्कर्ष:
करवा चौथ केवल एक पारंपरिक व्रत नहीं, बल्कि यह चंद्र ऊर्जा से संबंध जोड़ने का अवसर है।
यह दिन हमें सिखाता है कि रिश्ते केवल कर्मकांड से नहीं, बल्कि ऊर्जा और भावना के संतुलन से मजबूत बनते हैं।
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