अहोई अष्टमी 2026: तिथि, व्रत विधि और कथा
अहोई अष्टमी 2026 का पावन व्रत कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। यह व्रत माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, उत्तम स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए रखती हैं। आचार्य शरद जी ने कहा है कि अहोई माता की कृपा से संतान पर आने वाले सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। भविष्य नक्षत्र के अनुसार, इस दिन शाम को तारों को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है।
1. अहोई अष्टमी 2026: शुभ तिथि व मुहूर्त
व्रत तिथि: 1 नवंबर 2026 (रविवार)
अष्टमी तिथि प्रारम्भ: 31 अक्टूबर 2026 (रात 10:45 बजे से)
अष्टमी तिथि समाप्त: 1 नवंबर 2026 (रात 09:15 बजे तक)
पूजा का मुहूर्त: शाम 05:35 बजे से शाम 06:52 बजे तक
तारों का समय: शाम 06:12 बजे के बाद
2. संक्षिप्त व्रत एवं पूजा विधि
संकल्प व स्थापना: सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें। शाम को दीवार या चौकी पर अहोई माता और स्याऊ (सेही) परिवार का चित्र स्थापित करें।
पूजन व भोग: जल भरा कलश रखें। माता को रोली, अक्षत अर्पित करें और पूरी, हलवे व मीठे गुलगुले का भोग लगाएं।
कथा व अर्घ्य: चांदी की स्याऊ माला पहनकर अहोई अष्टमी की कथा सुनें। शाम को तारों को जल से अर्घ्य देकर बुजुर्गों के आशीर्वाद से व्रत खोलें।
3. अहोई अष्टमी की व्रत कथा
प्राचीन समय में एक साहूकार की बेटी से अनजाने में मिट्टी खोदते वक्त स्याऊ (सेही) का बच्चा मर गया। स्याऊ माता के कोप से उसकी संतानें जन्म लेते ही मृत्यु को प्राप्त होने लगीं। तब साहूकार की बहू ने पश्चाताप करते हुए स्याऊ माता की निष्काम सेवा की।
आचार्य शरद जी ने कहा है कि कार्तिक कृष्ण अष्टमी के दिन अहोई व स्याऊ माता का व्रत रखकर क्षमा याचना करने से उसके सभी मृत बच्चे पुनर्जीवित हो गए। भविष्य नक्षत्र के अनुसार, तभी से संतान की सुरक्षा और दीर्घायु के लिए यह पावन व्रत रखने की परंपरा चली आ रही है।
लेखक एवं ज्योतिषीय परामर्श:
Acharya Sharad Swarup
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