जन्माष्टमी, भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का दिन, पूरे भारत में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन कृष्ण जन्म के प्रतीक स्वरूप उनका झूला सजाया जाता है और भक्त प्रेमपूर्वक झूला झुलाते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस परंपरा के पीछे क्या आध्यात्मिक और ज्योतिषीय कारण हैं?
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झूला झुलाने का आध्यात्मिक महत्व
भक्तगण मानते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण को झूला झुलाना उनके जन्म का आनंद मनाने और प्रेम अर्पित करने का तरीका है। यह क्रिया सौभाग्य, समृद्धि और शांति लाने वाली मानी जाती है।
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झूला झुलाना मंगलकारी कार्य है, जिससे घर में सुख-समृद्धि आती है।
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यह कार्य मां यशोदा के स्नेह का प्रतीक है, जिसमें भक्त अपने भावों को व्यक्त करते हैं।
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ज्योतिष के अनुसार, इस क्रिया से ग्रह दोष कम होते हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
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जन्माष्टमी पर लोग भगवान कृष्ण की झूला क्यों झुलाते हैं? – ज्योतिषीय दृष्टि से कारण
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ग्रहों की अनुकूलता: इस दिन झूला झुलाने से चंद्रमा और बुध के अशुभ प्रभाव कम होते हैं।
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शुभ संकल्प: भक्त जब झूला झुलाते हैं तो अपने जीवन में शुभ संकल्प लेते हैं।
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भक्ति और ध्यान: यह क्रिया मन को भक्ति भाव में डुबो देती है और मानसिक शांति देती है।
निष्कर्ष
भगवान श्रीकृष्ण का झूला झुलाना केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि भक्ति, प्रेम और ज्योतिषीय आशीर्वाद पाने का एक सुंदर माध्यम है। यदि आप जानना चाहते हैं कि जन्माष्टमी पर आपके लिए कौन से पूजन और उपाय सबसे शुभ होंगे, तो हमारी वेबसाइट पर जन्माष्टमी विशेष लेख पढ़ें और विशेषज्ञ परामर्श लें।
